

बवाल के बीच काठमांडू शहर में अगले आदेश तक कर्फ्यू जारी रखने का फैसला लिया गया है।

काठमांडू एयरपोर्ट की सभी उड़ानें रद्द✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
काठमांडू एयरपोर्ट बंद है। काठमांडू एयरपोर्ट की सभी फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं। रोजाना संचालित होने वाली 250 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई हैं। इनमें एयर इंडिया, इंडिगो, फ्लाई दुबई, एयर अरेबिया और सिंगापुर एयरलाइंस जैसी एयरलाइंस शामिल हैं।
हिंसा, तनाव और कर्फ्यू
- नेपाल सरकार ने काठमांडू और आसपास के इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाए जाने के बावजूद, उपद्रव जारी हैं और राजधानी में तनाव बरकरार है।
- देश की राजधानी और ललितपुर में कर्फ्यू जारी है, ताकि स्थिति शांत हो सके।
- सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप, यूट्यूब समेत 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाया गया प्रतिबंध 9 सितंबर को हटा दिया था।
- हालांकि प्रतिबंध हटाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी अब सिर्फ सोशल मीडिया खुलवाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक जवाबदेही जैसी व्यापक मांगें कर रहे हैं।
हताहतों और घायलों की संख्या
खबरों के मुताबिक, हिंस विरोध-प्रदर्शन में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है। 300 से ज्यादा लोग घायल हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घरेलू हिंसा और हमलों की रिपोर्ट
प्रदर्शनकारी विदेश मंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी पर हमला कर चुके हैं। हालात बेहद गंभीर हैं। प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री और उप प्रधानमंत्री पौडेल को भी पीटा। नेपाली सेना ने पूरे देश में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए हस्तक्षेप किया और सुरक्षा की कमान अपने हाथ में ले ली।
राजनीतिक रिक्तता और आगे की अनिश्चितता
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद, फिलहाल नेपाल में स्थिर सरकार नहीं है और राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। Gen-Z आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे सिर्फ नेतृत्व में बदलाव ही नहीं बल्कि गहरे राजनीतिक सुधार की मांग कर रहे हैं।
इस्तीफे के बाद कहां हैं ओली?
- मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ओली “दुबई भागने की फिराक” में थे, लेकिन एयरपोर्ट बंद होने की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया।
- खबरों में कहा गया है कि ओली 9 सितंबर की शाम शिवपुरी के सैन्य छावनी (बुढानिलकण्ठ) पहुंचे और वहां सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
नेपाल में कब क्या हुआ?
- 4 सितंबर को सरकार ने कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बंदी लगा दी, जिससे युवा वर्ग में भारी नाराजगी फैली।
- 8 सितंबर को काठमांडू में बड़े पैमाने पर Gen-Z आंदोलन शुरू हुआ। युवा, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे और सोशल मीडिया प्रतिबंध को वापस लेने की मांग की।
- 9 सितंबर को प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने आंसू गैस, रबर की गोलियां और गोली चलाई, 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए।
- हिंसा के बीच सरकार ने सोशल मीडिया प्रतिबंध को वापस ले लिया।
- प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सिंह दरबार, सर्वोच्च न्यायालय, प्रेसीडेंट हाउस, पीएम का आवास (बालकोट) समेत कई मंत्रियों के घरों में आग लगा दी।
- केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपनी इस्तीफा-पत्र में उन्होंने कहा कि वे संविधान के अनुसार राजनीतिक समाधान में सहायता करना चाहते हैं।
- संसद में हंगामा और हिंसा के कारण त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया। सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं
- सेना ने कर्फ्यू लागू कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और सभी प्रमुख स्थलों की निगरानी शुरू की।हथियारों से लैस प्रदर्शनकारी नेपाल की संसद में घुसते दिखे. अज्ञात हथियारबंद लोग विरोध प्रदर्शन की आड़ में सरकार के खिलाफ हिंसा कर रहे है, जबकि केपी शर्मा ओली मंगलवार दोपहर में ही पीएम पद से इस्तीफा दे दिया.
जानकारों का मानना है कि पड़ोदी देश नेपाल में ये अराजकता चंद स्वार्थी समूहों और नेताओं की ओर से भड़काई जा रही है, क्योंकि वो इस माहौल का फायदा उठाकर सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं. विरोध प्रदर्शन की आड़ में औद्योगिक संस्थानों, सरकारी ऑफिस और यहां तक कि पुलिस थानों पर भी हमले किए गए.
‘मॉल्स और बैंकों में घुसकर लूटपाट’
प्रदर्शनकारियों ने मॉल्स और बैंकों में घुसकर लूटपाट की. Gen-Z के नेतृत्व में शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में राष्ट्रपति भवन, संसद, सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री कार्यालय तक आगजनी की गई, किसी को भी बख्शा नहीं गया. कई मंत्रियों के घरों को भी निशाना बनाया गया. यहां तक कि उन्हें सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया.
स्थिति को काबू करने में जुटी नेपाली सेना
नेपाल में हालात बिगड़ते देख वहां की आर्मी को जिम्मा सौंपा गया है. हालांकि, एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सेना से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन सेना ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था. इसी के बाद ओली को इस्तीफा देना पड़ा और वो हेलिकॉप्टर से कहीं सुरक्षित जगह पर चले गए.
विशेषज्ञों का कहना है कि सत्ता परिवर्तन का ये मॉडल बांग्लादेश जैसा हो सकता है, जहां सामाजिक असंतोष के बहाने सत्ता परिवर्तन की कवायद की जाती है. सेना ने अब नेपाल को अपने हाथ में ले लिया है और स्थिति को काबू में करने की कोशिश जारी है, लेकिन माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है.
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