

जांच में सामने आया कि फर्मों ने सरकार को 9.72 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। जिसके बाद फर्मों ने मौके पर ही फौरी तौर पर 1.27 करोड़ रुपये जमा करा दिए। विभाग की छापेमारी से स्थानीय कारोबारियों और ठेकेदारों में हड़कंप मचा रहा।

यह कार्रवाई आयुक्त राज्य कर सोनिका के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त आरएल वर्मा के नेतृत्व में की एसआइबी हरिद्वार की ओर से की गई। जांच में साफ हो गया कि संबंधित फर्में बड़े पैमाने पर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का सहारा लेकर सरकार को चूना लगा रही हैं। शुरुआती जांच में ही 9.72 करोड़ रुपये की कर चोरी उजागर हो गई।
एआई की मदद से खुला खेल
इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश आधुनिक तकनीक के माध्यम से किया गया। जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध डेटा और फर्मों की ओर से लिए गए आइटीसी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से विश्लेषण किया गया, जिसमें कई संदिग्ध पैटर्न सामने आए। इसी आधार पर विशेष अनुसंधान शाखा ने दो अलग-अलग जांच टीमें बनाकर दोनों जिलों में एक साथ छापे मारे। कार्रवाई करने वाली टीम में उपायुक्त कार्तिकेय वर्मा, सहायक आयुक्त अशोक कुमार, हरिकृष्ण खुगशाल आदि शामिल रहे।
चोरी पकड़ी गई तो तत्काल जमा कराने पड़े 1.27 करोड़
छापेमारी के दौरान जब दस्तावेजों और आइटीसी क्लेम का मिलान किया गया तो बड़े स्तर पर गड़बड़ियां खुलती चली गईं। दबाव बढ़ते ही संबंधित फर्मों ने मौके पर ही 1.27 करोड़ रुपये जमा करा दिए। संभव है कि विस्तृत जांच के बाद कर चोरी का आंकड़ा और ऊपर जाएगा।
दस्तावेज जब्त, जांच तेज
टीम ने जीएसटी अधिनियम-2017 के तहत जरूरी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया है। अब इनकी विस्तृत जांच की जा रही है, जिसके बाद संबंधित फर्मों पर कर, ब्याज और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
ठेकेदारी सिस्टम में बड़े फर्जीवाड़े का अंदेशा
जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदार फर्में अपने ठेकों पर बनने वाली कर देनदारी से बचने के लिए फर्जी आइटीसी का सहारा ले रही हैं। ऐसी और भी फर्में सामने आ सकती हैं। लिहाज, आयुक्त राज्य कर सोनिका ने वर्क कांट्रेक्ट से जुड़ी फर्मों की सघन जांच के निर्देश दिए हैं।




