

ऐसे में अब अमेरिका के तेवर भी ठंडे पड़े हैं. हाल ही में अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान जंग के ‘असली मकसद’ गिनाए हैं, जिसमें ट्रंप का सबसे खौफनाक इरादा शामिल हैं. अमेरिका के नए ऑब्जेक्टिव सुनकर मोजतबा राहत की सांस ले सकते हैं.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
क्या बदल गया है अमेरिका का मकसद?
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन में लाइव आकर साफ किया कि अमेरिका का असली मकसद क्या है. उन्होंने कहा, ‘हमारा ऑब्जेक्टिव पहले दिन से तय है ईरान की मिसाइलें, लॉन्च पैड्स और उसके पूरे इंडस्ट्रियल बेस को इस तरह तबाह करना कि वे दोबारा खड़े न हो सकें’. हेगसेथ ने यह भी साफ किया है कि वो ईरान की नौसेना को पूरी तरह खत्म करेंगे और उसे कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे. हेगसेथ ने अपने बयान में एक बार भी ये नहीं कहा कि अमेरिका ईरान में रिजीम चेंज चाहता है.
ट्रंप कुछ और ही चिल्ला रहे थे
हालांकि, इससे पहले ट्रंप कई बार ये चिल्ला-चिल्लाकर बोल चुके हैं कि उनका मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन करना और अपनी पसंद का सुप्रीम लीडर बिठाना है. ट्रंप ने ये भी कहा था कि उनकी मर्जी के खिलाफ बिठाए गए किसी भी सुप्रीम लीडर को जान का खतरा है.
मोजतबा के लिए खतरा टला या नहीं?
ट्रंप और नेतन्याहू की ऐसी ही धमकियों की वजह से मोजतबा सुप्रीम लीडर बनने के बाद से एक बार भी दुनिया के सामने नहीं आए हैं. अब जब अमेरिका ने अपने ऑब्जेक्टिव बदल लिए हैं तो एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि मोजतबा राहत की सांस ले सकते हैं.
हालांकि, पीट हेगसेथ ने अपने बयान में ये भी कहा है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल दोनों के मकदस अलग-अलग हैं. इसका मतलब ये हो सकता है कि US भले ही मोजतबा को टारगेट ना करे लेकिन नेतन्याहू की तिरछी नजर उन पर कभी भी अटैक कर सकती है




