

दूसरा इनके गांव का है। तीनों पर प्रवीण के लिए काम करने, लोगों की जमीनों पर कब्जा और अवैध दस्तावेज बनाकर बेचने में जुड़े होने का आरोप है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)
एसटीएफ एसएसपी नवनीत भुल्लर ने गुरुवार दोपहर प्रेस वार्ता कर बताया कि पिछले कुछ महीनों से सूचनाएं और अज्ञात व्यक्तियों के प्रार्थना पत्र मिल रहे थे। इनमें बताया गया था कि प्रवीण वाल्मीकि कुख्यात सुनील राठी गैंग का हिस्सा रह चुका है। वह हरिद्वार में हत्या, रंगदारी और अवैध संपत्ति कब्जाने में शामिल है। वर्तमान में सितारगंज जेल में बंद प्रवीण गुर्गों के जरिए हरिद्वार में पार्किंग ठेकों और लोगों की बेशकीमती जमीनों को धमकाकर हड़प रहा है। इस गैंग ने अब तक कई हत्याएं और आपराधिक गतिविधियां अंजाम दी हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक स्वप्न किशोर सिंह और पुलिस उपाधीक्षक आरबी चमोला की टीम ने सूचनाओं की जांच शुरू की। जांच में तथ्यों की पुष्टि होने पर 27 अगस्त को निरीक्षक एनके भट्ट के नेतृत्व में थाना गंगनहर में प्रवीण वाल्मीकि, उसके भतीजे मनीष बॉलर और पंकज अष्टवाल सहित छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया किया गया। 27 अगस्त की देर रात एसटीएफ ने हरिद्वार के गंगनहर क्षेत्र से मनीष बॉलर और पंकज अष्टवाल को गिरफ्तार कर लिया। दोनों सुनेहरा, थाना गंगनहर, हरिद्वार के निवासी हैं। मनीष भाजपा से रुड़की नगर निगम का पार्षद भी है। वहीं गुरुवार शाम इस गैंग से फर्जी रजिस्ट्री कराने में शामिल रही होमगार्ड की पत्नी निर्देश को गिरफ्तार किया।
वाल्मीकि गैंग के डर से परिवार गांव छोड़कर चला गया
एसटीएफ जांच में खुलासा हुआ कि प्रवीण वाल्मीकि गैंग ने रुड़की के सुनेहरा गांव में श्याम बिहारी की करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़प ली। श्याम बिहारी की 2014 में मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति की देखभाल उनके छोटे भाई कृष्ण गोपाल कर रहे थे। 2018 में गैंग ने कृष्ण गोपाल की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद श्याम की पत्नी रेखा ने संपत्ति की देखभाल शुरू की। प्रवीण ने संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाया। रेखा के मना करने पर 2019 में उनके भाई सुभाष पर गोली चलाई गई। इसके बाद यह परिवार रुड़की से चला गया। गैंग ने फर्जी ढंग से स्नेहलता के नाम से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई और संपत्ति को बेच दिया। इस काम में मनीष बॉलर और पंकज अष्टवाल ने मुख्य भूमिका निभाई।




