

रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप और शिव नगर क्षेत्र में बिजली व्यवस्था की बदहाली केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और जनसुरक्षा के प्रति उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है। मकानों के ऊपर से गुजरती 11 केवी की हाईटेंशन लाइनें किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब खतरा इतना स्पष्ट है तो फिर जिम्मेदार विभाग इसे दूर करने में इतना विलंब क्यों कर रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
पूर्व विधायक Rajkumar Thukral के नेतृत्व में स्थानीय लोगों द्वारा अधिशासी अभियंता कार्यालय का घेराव इस बात का संकेत है कि जनता की सहनशीलता अब जवाब देने लगी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होती, बल्कि जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना और उनका समाधान सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी होती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो यह घेराव जनता की पीड़ा और आक्रोश की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि होली जैसे पर्व के दिन कमल कोली नामक युवक इसी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया था। यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि चेतावनी थी कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि अक्सर विभागीय तंत्र किसी बड़े हादसे के बाद ही सक्रिय होता है, जबकि जिम्मेदारी यह होनी चाहिए कि संभावित खतरे को पहले ही समाप्त कर दिया जाए।
ट्रांजिट कैंप क्षेत्र लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझता रहा है। बिजली के पुराने खंभे, जर्जर तार और अनियमित आपूर्ति यहां के निवासियों के लिए स्थायी समस्या बन चुके हैं। नए खंभे लगाने, तारों को व्यवस्थित करने और बंद पड़े कनेक्शनों को बहाल करने जैसे कदम तकनीकी दृष्टि से कठिन नहीं हैं, लेकिन इन पर समय पर ध्यान न देना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।
इस पूरे प्रकरण का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि स्थानीय व्यापारी और नागरिक संगठित होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। जब समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होता है, तभी प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेह बनाया जा सकता है। लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि ऐसे आंदोलनों को केवल ज्ञापन और आश्वासन तक सीमित न रहने दिया जाए। यदि समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से नहीं होता, तो यह जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
विद्युत विभाग को चाहिए कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर लेकर तुरंत सर्वे कराए और आबादी के ऊपर से गुजर रही 11 केवी लाइन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करे। साथ ही घायल युवक को उचित आर्थिक सहायता और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जनहित से जुड़े मामलों में विलंब न केवल प्रशासन की साख को नुकसान पहुंचाता है बल्कि नागरिकों के जीवन को भी जोखिम में डालता है।
अंततः यह समझना होगा कि विकास केवल बड़े प्रोजेक्टों से नहीं मापा जाता, बल्कि आम नागरिक की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से भी तय होता है। यदि सरकार और विभाग वास्तव में जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो ट्रांजिट कैंप और शिव नगर जैसे क्षेत्रों की समस्याओं का त्वरित समाधान होना चाहिए। क्योंकि जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन चाहिए।




