

देवी गौरी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों की हर मुराद शीघ्र पूरी हो जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि की अष्टमी पूजा के दिन मां गौरी की आराधना और कन्या पूजन करने से निसंतान दंपति को संतान का सुख प्राप्त होता है। देवी महागौरी एवं देवी शैलपुत्री दोनों का वाहन बैल है तथा इसी कारण से उन्हें वृषारूढ़ा के नाम से भी जाना जाता है। देवी महागौरी को चतुर्भुज रूप में दर्शाया गया है। वह अपने एक दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं तथा दूसरे दाहिने हाथ को अभय मुद्रा में रखती हैं। वह एक बायें हाथ में डमरू धारण करती हैं और दूसरे बायें हाथ को वर मुद्रा में रखती हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
महाअष्टमी पूजा के दिन मां गौरी को हलवा, पूड़ी, खीर, नारियल और केला, सेब और बताशा आदि चीजों का भोग जरूर लगाएं। इसके साथ ही नवरात्रि महाअष्टमी के दिन मां गौरी की आरती अवश्य करें। इसके साथ देवी गौरी के मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी होता है।
मां गौरी जी की आरती (Maa Gauri Ki Aarti)
जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवासा॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुण्ड में था जलाया। उसी धुयें ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आने वाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥
देवी महागौरी पूजा मंत्र
- या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥
- हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणि कांतकातां सुदुर्लभाम्॥
- ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
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