बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक और अन्य वाहन दिसंबर से ग्रीन सेस देकर ही उत्तराखंड में प्रवेश पाएंगे। 12 सीट से बड़ी बसों को छोड़ दिया जाए तो हर वाहन पर ये टैक्स हिमाचल प्रदेश से ज्यादा होगा।

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इससे प्रदेश के पर्यटन कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

नैनीताल-मसूरी जैसे शहरों में पहले ही कई तरह के टैक्स लगे हैं अब ग्रीन सेस बढ़ने से पर्यटकों के दूसरे राज्यों के तरफ जाने का डर कारोबारियों को सताने लगा है। हालांकि उत्तराखंड में पंजीकृत सभी तरह के वाहनों को ग्रीन सेस से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

सरकार ने पिछले साल फरवरी 2024 में ग्रीन सेस वसूलने का निर्णय लिया था, जिसे अब तक लागू नहीं किया जा सका। तब 20 से 80 रुपये तक ग्रीन सेस तय किया था। अब ग्रीन सेस की दरें 80 रुपये से लेकर 700 रुपये तक तय की गई हैं। यह दरें पड़ोसी राज्य हिमाचल से ज्यादा हैं, जहां पहले से ही दूसरे राज्यों के सभी वाहनों के साथ अपने यहां पंजीकृत मालवाहक वाहनों से भी एंट्री टैक्स वसूलता है।

उत्तराखंड ने उत्तर प्रदेश और हिमाचल की सीमा पर स्थित 10 बार्डर चेक पोस्ट को ग्रीन सेस लेने के लिए तैयार कर दिया है। छह अन्य स्थानों पर भी इसकी तैयारी है। देहरादून में हिमाचल प्रदेश की पौंटा सीमा के साथ ही यूपी प्रदेश बार्डर पर तिमली रेंज, आशारोड़ी, हरिद्वार में नारसन बॉर्डर, गोवर्धनपुर, चिड़ियापुर और कुमाऊं के उधमसिंहनगर में यूपी की सीमा पर स्थित खटीमा, काशीपुर, जसपुर, रुद्रपुर, पुल भट्टा (बरेली रोड) पर एपीएनआर कैमरों से ग्रीन सेस लिया जाएगा।

सेब, टमाटर और आलू के सीजन में हिमाचल बाहरी राज्यों के ऐसे मालवाहक वाहनों को एंट्री टैक्स से छूट भी देता है, जो इन फसलों के ढुलान के लिए हिमाचल पहुंचते हैं। उत्तराखंड में अभी इस पर परिवहन विभाग ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। उत्तराखंड को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से पेमेंट गेटवे की अनुमति भी मिल चुकी है।


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