

रुद्रपुर। देवभूमि उत्तराखंड के प्रवेश द्वार रुद्रपुर में अब श्रद्धा और आध्यात्म का नया प्रतीक स्थापित हो चुका है। इंदिरा चौक का नाम परिवर्तित कर “त्रिशूल चौक” रखा गया है तथा यहां भव्य और चमचमाता हुआ पीतल का विशाल त्रिशूल स्थापित किया गया है। यह केवल सौंदर्यीकरण का कार्य नहीं, बल्कि नगर की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
रुद्रपुर, जो प्रदेश के मैदानी क्षेत्र का प्रमुख औद्योगिक नगर है, अब अपने प्रवेश द्वार पर शिव शक्ति का प्रतीक स्थापित कर यह संदेश दे रहा है कि विकास और अध्यात्म साथ-साथ चल सकते हैं। त्रिशूल के दर्शन मात्र से लोगों के भीतर श्रद्धा का भाव जागृत हो रहा है। सुबह-शाम राहगीर और वाहन चालक एक क्षण रुककर या सिर झुकाकर भोलेनाथ को नमन कर रहे हैं।
त्रिशूल भगवान शिव का प्रतीक है, जो सृजन, पालन और संहार की त्रयी शक्ति का द्योतक है। देवभूमि में प्रवेश करते ही इस प्रतीक का दर्शन होना लोगों को यह एहसास कराता है कि वे एक ऐसी भूमि में आए हैं जहां अध्यात्म जीवन का आधार है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर की तैयारियों के बीच यह स्थापना और भी अधिक महत्व रखती है।
चौक के पूजन कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इसे एक सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया। नगर निगम द्वारा किया गया यह प्रयास रुद्रपुर की पहचान को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने भी इसे सकारात्मक पहल बताते हुए स्वागत किया है।
नगर निगम रुद्रपुर और महापौर श्री विकास शर्मा को इस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहल के लिए हार्दिक बधाई। आशा है कि नगर की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
हर-हर महादेव!




