

रुद्रपुर कलेक्ट्रेट में पीड़िता का धरना, प्रशासन ने दिया न्याय का भरोसा
रुद्रपुर। कलेक्ट्रेट परिसर, रुद्रपुर में भू-माफियाओं से पीड़ित महिला अपने पूरे परिवार के साथ धरने पर बैठ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया और मौके पर पहुंचकर पीड़िता से वार्ता की। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सोमवार को जिलाधिकारी से आमने-सामने बैठक कराई जाएगी और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए न्याय दिलाया जाएगा। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स पहले ही भू-माफियाओं के राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा उठाता रहा है। प्रशासन की यह पहल अब सवालों के घेरे में खड़े भू-माफियाओं पर कार्रवाई की उम्मीद जगा रही है। पूर्व शिक्षा मंत्री गदरपुर विधायक अरविंद पांडे, पर भू माफिया को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया

बाजपुर/रामपुर। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की सीमा से सटे उधम सिंह नगर जिले में भूमि कब्जे और महिला उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता किन्दरजीत कौर पत्नी जगतार सिंह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली को शिकायती पत्र भेजकर दबंगों पर हथियारों के बल पर उसकी जमीन पर कब्जा करने, जान से मारने की धमकी देने और पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता का आरोप लगाया है।
पीड़िता के अनुसार उसकी ग्राम कनौरी, काशीपुर बाईपास रोड, तहसील बाजपुर (उधम सिंह नगर) में हाईवे से सटी लगभग चार एकड़ भूमि है, जो उसके तथा उसके 15 वर्षीय नाबालिग पुत्र गुरदित्त सिंह के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इसके अतिरिक्त ग्राम शेखुपुरा, तहसील स्वार, जिला रामपुर (उ.प्र.) में भी पीड़िता की करीब नौ एकड़ भूमि है।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
आरोप है कि पीड़िता के तहेरे जेठ बलकार सिंह, बखसिन्दर सिंह सहित कई परिजन व बाहरी सहयोगियों ने मिलकर उसकी दोनों जमीनों पर जबरन कब्जा करने की साजिश रची। शिकायत के मुताबिक 02 दिसंबर 2024 को दोपहर करीब 2:30 बजे कनौरी स्थित भूमि पर ट्रैक्टरों से खड़ी फसल जोत दी गई, जबकि आरोपी पक्ष अवैध हथियारों से लैस था। इस दौरान 30 से 40 लोगों की मौजूदगी बताई गई है।
पीड़िता का कहना है कि आरोपियों ने खुलेआम धमकी दी कि जो भी बीच में आएगा, उसे गोली मार दी जाएगी, और यह भी कहा गया कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। घटना के बाद पीड़िता ने थाना बाजपुर, पुलिस चौकी दोराहा और परगना अधिकारी बाजपुर को लिखित शिकायत दी, लेकिन कथित तौर पर राजनीतिक प्रभाव और दबाव के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दबंगों ने पीड़िता के घर का रास्ता अवरुद्ध कर रखा है। ट्रैक्टर खड़े कर रास्ता रोका जा रहा है और कुर्सियां डालकर वहीं बैठकर पहरा दिया जा रहा है। पीड़िता के अनुसार उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां लगातार दी जा रही हैं। पीड़िता का पति बीमार रहता है और दो बेटियां पढ़ाई कर रही हैं, जिन पर भी मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़िता ने दावा किया है कि उसके पास घटना से संबंधित वीडियो और फोटोग्राफिक साक्ष्य मौजूद हैं। आरोपियों द्वारा महिला के साथ अश्लील शब्दों के प्रयोग और घर में घुसकर हमला करने की साजिश रचने के आरोप भी लगाए गए हैं।
अरविंद पांडे को लेकर सामने आए आरोपों ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जिस तरह अचानक पुराने भूमि विवादों को उछाला गया, धरना-प्रदर्शन कराए गए और सोशल मीडिया पर एकतरफा नैरेटिव गढ़ा गया, उससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि पूर्व मंत्री को योजनाबद्ध तरीके से टारगेट किया जा रहा है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, आंतरिक गुटबाजी और भूमि माफिया के हित इस पूरे घटनाक्रम के पीछे हो सकते हैं। ऐसे में बिना निष्पक्ष प्रशासनिक और न्यायिक जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुँचना लोकतंत्र और न्याय—दोनों के लिए खतरनाक होगा।
आत्मदाह की चेतावनी देकर कलेक्ट्रेट पहुंची पीड़ित महिला को शासन-प्रशासन एसडीएम गौरव पाण्डे, अमृता शर्मा, सीओ आर डी वर्मा एवं तहसीलदार दिनेश कुटोला आदि ने समय रहते समझाया। अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए न्याय का भरोसा दिया और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर महिला को सुरक्षित घर भेजा गया।
मानवाधिकार आयोग से पीड़िता ने मामले में हस्तक्षेप कर भूमि पर कब्जा हटवाने, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। मामले ने एक बार फिर महिला सुरक्षा, नाबालिग के अधिकारों और भूमि विवादों में प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।




