अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सियासत तेज, आरोप-प्रत्यारोप से गर्माया उत्तराखंड

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उत्तराखंड अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति में उबाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस जहां सरकार पर जवाबदेही तय करने के लिए हमलावर है, वहीं भाजपा ने भी पलटवार करते हुए इसे अनुसूचित जाति और मातृशक्ति के अपमान से जोड़ दिया है। दोनों दलों के बीच बयानबाज़ी अब सड़क से लेकर सियासी मंचों तक पहुंच गई है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए इंटरनेट मीडिया पर वायरल एक महिला नेत्री के वीडियो का उल्लेख किया और कहा कि सच सामने लाने के लिए वह महिला धन्यवाद की पात्र है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का किसी पूर्व विधायक की पत्नी से कोई संबंध नहीं है। कांग्रेस की प्राथमिकता केवल अंकिता को न्याय दिलाना है।
गोदियाल ने भाजपा द्वारा अनुसूचित जाति अपमान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अपराध की कोई जाति नहीं होती। यदि किसी व्यक्ति पर आरोप हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं, जिनकी जांच से किसी को नहीं बचना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पूरे प्रकरण को उत्तराखंड के स्वाभिमान से जोड़ते हुए कहा कि यदि कांग्रेस ने भाजपाई षड्यंत्र का भंडाफोड़ किया, तो वर्ष 2027 में सत्ता की राह स्वतः सुगम होगी। उन्होंने घोषणा की कि 16 जनवरी तक वह अपनी समस्त गतिविधियां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा तय कार्यक्रमों को समर्पित करेंगे।
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर अनुसूचित जाति समाज और मातृशक्ति के अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास यदि कोई साक्ष्य है तो वह न्यायालय में प्रस्तुत करे। महिला को राजनीतिक हथियार बनाकर समाज को भड़काया जा रहा है, जिससे अनुसूचित जाति समाज में रोष है। इसके विरोध में भाजपा ने प्रदेशभर में कांग्रेस के पुतले फूंकने की घोषणा की है।
लेकिन असली सवाल अब भी कायम है…
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस या भाजपा के पुतलों की नहीं, निष्पक्ष सीबीआई जांच की जरूरत है।
यदि सरकार की नीयत साफ है तो जांच से डर क्यों?
रिमोट कंट्रोल से चलने वाली धामी सरकार को बयानबाज़ी छोड़कर सीबीआई जांच के लिए तैयार होना चाहिए, ताकि सच सामने आए और उत्तराखंड की बेटी को न्याय मिल सके।


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