Uttarakhand: कहते हैं कि मृत्यु के बाद हर मनुष्य को अपने कर्मों का हिसाब देना होता है. जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर ही मनुष्यों को अगला जन्म मिलता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मृत्यु के बाद कहां पर कर्मों का हिसाब-किताब किया जाता है?

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उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जहां मनुष्यों को अपने सभी कर्मों का हिसाब देना होता है. माना जाता है कि अगर जीते-जी इस मंदिर के दर्शन कर लिए जाएं तो कर्मों से हिसाब से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं धर्मेश्वर महादेव मंदिर के बारे में.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

धर्मेश्वर महादेव मं​दिर में यमराज की अदालत

धर्मेश्वर महादेव उत्तराखंड में मौजूद चौरासी मंदिर परिसर के अंदर स्थित एक चमत्कारी मंदिर है. माना जाता है कि मनुष्यों के कर्मों के हिसाब के लिए यहां यमराज की अदालत भी लगती है.

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गर्भगृह में शिवलिंग का अद्भुत स्वरूप

धर्मेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में मटके के आकार के शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं, जिन्हें यमराज का ही रूप माना जाता है. मंदिर के इतिहास की बात करें तो माना जाता है कि इसी स्थल पर महाराज कृष्ण गिरि ने साधना की थी और स्थान को पवित्रस्थली बनाया था.

स्वयं साक्षात् यमराज स्वरूप हैं भगवान शिव

साक्षात् यमराज के रूप में विराजित भगवान शिव चित्रगुप्त की सहायता से मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं. मंदिर के पीछे की तरफ एक स्थान चित्रगुप्त को दिया गया है.

ऐसे तय होता है स्वर्ग और नरक

जमीन पर आपको एक काली शिला और पट्टी दिखने को मिलेगी, जिस पर पत्थर से कुछ लकीरें बनाई गई हैं. माना जाता है कि यह तरीका ही तय करता है कि मनुष्य स्वर्ग जाएगा या नरक.

अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माएं व्यतीत करती हैं समय

इतना ही नहीं, मंदिर की कुछ दूरी पर ढाई पौड़ी नाम का स्थान बना है. ढाई पौड़ी एक ऐसी जगह है, जहां अकाल मृत्यु से मरे लोगों को अपना बाकी समय काटना होता है.

भाई दूज पर लगती है भीड़

भाई दूज के मौके पर मंदिर में विशेष भीड़ लगती है. बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना के लिए मंदिर में विशेष दर्शन के लिए आती हैं. स्थानीय मान्यता है कि जो भी मंदिर में जीते-जी दर्शन के लिए नहीं आता, उसे मरने के बाद इसी स्थल पर आकर भगवान धर्मेश्वर महादेव का सामना करना पड़ता है.


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