

14 फरवरी को दुनिया भर में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है। इस दिन को संत वेलेंटाइन की स्मृति से जोड़ा जाता है। परंपरा के अनुसार, तीसरी शताब्दी में रोमन साम्राज्य के दौरान सम्राट Claudius II ने सैनिकों के विवाह पर रोक लगा दी थी। कहा जाता है कि एक ईसाई पादरी Saint Valentine ने इस आदेश का विरोध करते हुए प्रेमी युगलों का गुप्त रूप से विवाह कराया। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर मृत्युदंड दिया गया। पाँचवीं शताब्दी में पोप Pope Gelasius I ने 14 फरवरी को संत वेलेंटाइन के सम्मान में स्मृति दिवस घोषित किया। समय के साथ यह दिन प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में लोकप्रिय हो गया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
इतिहास के इस प्रसंग से एक बात स्पष्ट होती है—प्रेम को अपराध नहीं माना गया, बल्कि उसे मानवीय भावनाओं की अभिव्यक्ति समझा गया। लेकिन आधुनिक समय में प्रेम, रिश्तों और सोशल मीडिया के दौर ने कई नई चुनौतियाँ भी खड़ी की हैं।
सबसे पहले एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट करना ज़रूरी है—किसी भी समुदाय या धर्म को “प्रेम के नाम पर साजिश” से जोड़ देना न तो तथ्यपरक है और न ही समाज के लिए स्वस्थ। “लव जिहाद” शब्द राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है, परंतु व्यक्तिगत धोखाधड़ी, छल, लालच या अपराध को किसी एक धर्म से जोड़ना वास्तविक समस्या से ध्यान हटाता है। धोखा देने वाला व्यक्ति किसी भी जाति, धर्म या वर्ग से हो सकता है। अपराध का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन सावधानी का कोई विकल्प भी नहीं होता।
आज के डिजिटल युग में रिश्तों का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया, चैटिंग ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बनता है। यहाँ सबसे अधिक खतरा “फर्जी पहचान” का होता है। कई मामलों में देखा गया है कि लोग नकली नाम, नकली प्रोफाइल फोटो और झूठी पृष्ठभूमि के साथ भावनात्मक संबंध बनाते हैं। धीरे-धीरे भरोसा जीतकर वे आर्थिक ठगी, ब्लैकमेल या शारीरिक शोषण तक पहुँच जाते हैं। यह समस्या केवल वैलेंटाइन डे तक सीमित नहीं, बल्कि साल भर मौजूद रहती है।
वैलेंटाइन डे जैसे अवसरों पर भावनाएँ अधिक प्रबल होती हैं। ऐसे में कुछ लोग जल्दी भरोसा कर बैठते हैं। खासकर युवा वर्ग को यह समझना चाहिए कि सच्चा प्रेम कभी जल्दबाजी नहीं करता। यदि कोई व्यक्ति आपसे अचानक गहरी भावनाएँ व्यक्त करने लगे, जल्दी मिलने का दबाव बनाए, निजी फोटो या वीडियो मांगे, या पैसों की मदद चाहे—तो यह स्पष्ट संकेत है कि आपको सावधान हो जाना चाहिए।
समाज में समय-समय पर ऐसे जघन्य अपराध सामने आए हैं, जिनमें संबंधों के नाम पर विश्वासघात हुआ। कुछ मामलों में हत्या तक की घटनाएँ सामने आईं, जिनमें पीड़ितों को सूटकेस या बैग में छिपाकर ले जाया गया। लेकिन इन घटनाओं को किसी एक धार्मिक षड्यंत्र के रूप में प्रस्तुत करना तथ्य से अधिक भय का निर्माण करता है। असली मुद्दा है—चरित्रहीनता, लालच, मानसिक विकृति और कानून का भय न होना।
हिंदू परंपरा में भगवान Krishna का प्रेम का संदेश अत्यंत व्यापक और आध्यात्मिक है। गीता में उन्होंने आसक्ति, मोह और अंधे आकर्षण से बचने का उपदेश दिया। प्रेम को वासना या स्वार्थ से ऊपर उठाकर आत्मिक संबंध के रूप में देखा गया। यदि किसी भी धर्म के युवक-युवती इस मूल भावना को समझ लें, तो धोखे और छल की गुंजाइश बहुत कम रह जाएगी।
सच्चा प्रेम सम्मान, सहमति और समानता पर आधारित होता है। उसमें किसी को अपना धर्म बदलने, परिवार से संबंध तोड़ने या पहचान छिपाने की ज़रूरत नहीं होती। यदि कोई रिश्ता छिपाव, डर या दबाव पर टिका है, तो वह प्रेम नहीं, बल्कि नियंत्रण या शोषण हो सकता है।
वैलेंटाइन डे न मनाने या मनाने का निर्णय व्यक्तिगत है। लेकिन किसी दिन को “खतरे का प्रतीक” घोषित कर देना समाधान नहीं है। समाधान है—जागरूकता, परिवार में संवाद, बच्चों को सही शिक्षा, और कानून का सख्त पालन। युवा वर्ग को यह सिखाया जाना चाहिए कि ऑनलाइन मित्रता में क्या सावधानियाँ रखें:
किसी अनजान व्यक्ति से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
पहली मुलाकात सार्वजनिक स्थान पर ही करें।
परिवार या मित्रों को जानकारी दें।
पैसों का लेन-देन बिल्कुल न करें।
किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी की स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
यह भी समझना आवश्यक है कि अंतरधार्मिक विवाह अपने आप में अपराध नहीं है। भारत का संविधान हर वयस्क को अपनी पसंद से विवाह करने की स्वतंत्रता देता है। यदि दो बालिग लोग सहमति से, पारदर्शिता और परिवार की जानकारी के साथ विवाह करते हैं, तो उसे षड्यंत्र कहना उचित नहीं। समस्या तब है जब झूठ, दबाव या छल हो।
कई बार सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश फैलाए जाते हैं, जिनमें कहा जाता है कि वैलेंटाइन डे मनाने वालों का जीवन दुख और गरीबी में बीतेगा। ऐसी बातें धार्मिक ग्रंथों की मूल शिक्षाओं से मेल नहीं खातीं। किसी भी धर्म में प्रेम, दया और सत्य को ही श्रेष्ठ बताया गया है। डर फैलाना या युवा पीढ़ी को अपराधबोध में धकेलना समाधान नहीं है।
आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है—भावनात्मक परिपक्वता। प्रेम का इज़हार करने से पहले व्यक्ति के चरित्र, परिवार, पृष्ठभूमि और व्यवहार को समझना ज़रूरी है। केवल आकर्षण या दिखावे के आधार पर जीवन का निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है।
यदि कोई रिश्ता आपको परिवार से अलग-थलग कर दे, आपकी स्वतंत्रता सीमित कर दे, या आपको अपने मूल्यों के विरुद्ध जाने पर मजबूर करे—तो रुककर सोचिए। प्रेम आपको मजबूत बनाता है, कमजोर नहीं।
साथ ही, समाज को भी संतुलन बनाए रखना होगा। हर अंतरधार्मिक संबंध को शक की निगाह से देखना सामाजिक विभाजन को बढ़ाता है। वहीं आँख मूंदकर भरोसा करना भी समझदारी नहीं। विवेक, संवाद और सत्यापन—ये तीन शब्द आज के दौर में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
वैलेंटाइन डे का वास्तविक संदेश त्याग, करुणा और निष्ठा से जुड़ा है। यदि इसे केवल उपभोक्तावादी संस्कृति या उन्मुक्त आकर्षण तक सीमित कर दिया जाए, तो उसका मूल अर्थ खो जाता है। प्रेम का अर्थ जिम्मेदारी भी है।
अंततः यह समझना होगा कि “लव जिहाद” जैसे शब्दों से अधिक महत्वपूर्ण है—“लव में ईमानदारी”। धोखा किसी भी नाम से हो, वह अपराध है। और सच्चा प्रेम किसी भी धर्म, भाषा या सीमा से ऊपर होता है।
इस वैलेंटाइन डे पर यदि आप प्रेम का इज़हार करना चाहते हैं, तो पहले यह सुनिश्चित करें कि वह संबंध विश्वास, सत्य और सम्मान पर आधारित हो। अनजान लोगों से सतर्क रहें, लेकिन नफरत से नहीं—सजगता से। डर से नहीं—विवेक से।
समाज को बांटने वाली अफवाहों से बचते हुए, अपराध के विरुद्ध सख्त और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना ही सही रास्ता है। प्रेम को अपराध बनने से रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है—कानून की भी, परिवार की भी और व्यक्तिगत समझ की भी।




