उत्तराखंड: दून से उठी इंसानियत की आवाज, जंग के बीच अमन की पहल“कश्मीर-उत्तराखंड: दूरियां अलग, संवेदनाएं एक”

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उत्तराखंड: दून से उठी इंसानियत की आवाज, जंग के बीच अमन की पहल
देहरादून की फिज़ाओं में इन दिनों एक अलग ही

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)भावनात्मक लहर देखने को मिल रही है।

जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव, युद्ध और तबाही की खबरें सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड की राजधानी से इंसानियत, भाईचारे और सहानुभूति की एक मिसाल सामने आई है। यह वही “सकारात्मक उत्तराखंड” है, जिसकी पहचान केवल पहाड़ों की सुंदरता से नहीं, बल्कि दिलों की गहराई से होती है।
इंसानियत की मिसाल: जब महिलाओं ने उतारे गहने
देहरादून के इंदर रोड स्थित इमामबारगाह में जो दृश्य सामने आया, वह केवल एक डोनेशन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का जीवंत चित्र था। “कनीजे जनाबे फातिमा जहरा” संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने गहने उतारकर दान किए, बच्चों ने अपनी गुल्लक तोड़ दी, और बुजुर्गों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी तक मदद के लिए समर्पित कर दी।
तीन साल की मासूम बच्ची द्वारा अपनी कान की बालियां दान करना इस पूरे आयोजन का सबसे भावुक क्षण बन गया—एक ऐसा पल जिसने हर आंख को नम कर दिया और यह साबित कर दिया कि इंसानियत उम्र की मोहताज नहीं होती।
जंग के बीच अमन की दुआ
यह पहल केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रही। समुदाय के लोगों ने अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में शहीद हुए मासूमों के लिए विशेष दुआएं भी कीं। यह दुआएं केवल ईरान के लिए नहीं थीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए थीं।
युद्ध की विभीषिका के बीच देहरादून से उठी यह आवाज एक संदेश देती है—कि उत्तराखंड की धरती आज भी “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को जीती है।
हज यात्रियों की चिंता, लेकिन विश्वास अडिग
ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर अब आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। खासतौर पर हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
उत्तराखंड से इस वर्ष 1366 हज यात्री पवित्र यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि वे अल्लाह से लगातार यही दुआ कर रहे हैं कि युद्ध समाप्त हो और उनका सफर सुरक्षित और आसान हो सके।
हज कमेटी अध्यक्ष खतीब अहमद और वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने भरोसा दिलाया है कि सरकार यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत
देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में 447 हज यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा न केवल जांच, बल्कि आवश्यक टीकाकरण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल बताती है कि उत्तराखंड प्रशासन संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है।
सकारात्मक उत्तराखंड: कश्मीर की तर्ज पर एक नई पहचान
जिस तरह “सकारात्मक कश्मीर” की अवधारणा ने घाटी की छवि को बदलने का प्रयास किया, उसी प्रकार “सकारात्मक उत्तराखंड” भी अब उभरता हुआ एक विचार बन सकता है।
यह घटना केवल एक धार्मिक समुदाय की मदद नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक ताने-बाने का उदाहरण है जहां—
मानवता धर्म से ऊपर होती है
दुख-दर्द की कोई सीमा नहीं होती
और मदद के लिए दिल बड़ा होना चाहिए, जेब नहीं
समाज के लिए संदेश
आज जब दुनिया विभाजन, संघर्ष और अविश्वास की ओर बढ़ती दिख रही है, ऐसे समय में देहरादून का यह उदाहरण पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकता है।
यह बताता है कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि “मानवता की भूमि” भी है—जहां संकट चाहे कहीं भी हो, दिल यहीं से धड़कते हैं।अमन की राह पर उत्तराखंड
देहरादून से उठी यह पहल एक छोटी सी किरण है, लेकिन यही किरण अंधकार को चुनौती देती है। जरूरत है कि इस भावना को और व्यापक बनाया जाए, ताकि उत्तराखंड न केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और वैश्विक भाईचारे के लिए भी पहचाना जाए।
“जहां दिलों में करुणा हो, वहीं असली देवभूमि बसती है।”


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