जब महिलाएं बनीं जलवायु योद्धा: रुद्रपुर से उठी हरित क्रांति की नई लहर

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रुद्रपुर (उत्तराखंड):एक समय था जब खेती सिर्फ पुरुषों का काम मानी जाती थी। लेकिन अब ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में स्थित एक्सटेंशन ट्रेनिंग सेंटर (ETC) में कुछ ऐसा घटित हो रहा है, जो उत्तराखंड के ग्रामीण जीवन की परिभाषा ही बदल सकता है। यहां महिलाएं अब सिर्फ खेतों की मेड़ पर नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती के खिलाफ मोर्चा संभाल रही हैं।

संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शुरू हुआ “जलवायु आधारित कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम” इन महिलाओं को न केवल तकनीकी रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि उन्हें ‘कृषि नवाचार की torchbearer’ भी बना रहा है।

बदलते मौसम, बदलती महिलाएं

पिछले कुछ वर्षों में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन कर उभरा है – मौसम का मिजाज। कब बारिश होगी, कब सूखा पड़ेगा – कुछ तय नहीं। ऐसे में फसलों का चयन, बुवाई का समय, सिंचाई के तरीके – सब कुछ विज्ञान और समझदारी से तय करना जरूरी हो गया है।

यही समझ अब रुद्रपुर की महिलाएं भी सीख रही हैं – मौसम पूर्वानुमान पढ़ना, जलवायु-अनुकूल बीज चुनना, मिट्टी की जांच करना, और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना। ये कोई साधारण बात नहीं – ये वह बदलाव है जिसे आने वाले वर्षों में “हरित उत्तराखंड की नींव” कहा जाएगा।

घर की चौखट से खेतों की चौपाल तक

“पहले तो हम बस घर का काम करते थे, खेत में मजदूरी करते थे, लेकिन अब हमें समझ आ गया है कि सही जानकारी से कैसे खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है,” – ये कहना है सितारगंज की गीता देवी का, जो इस प्रशिक्षण की अग्रणी प्रतिभागी हैं।

प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं को समूहों में काम करने, खेती के स्मार्ट तरीकों को अपनाने, और सरकारी योजनाओं से जुड़ने का भी अवसर मिल रहा है। खास बात यह कि यह कार्यक्रम केवल तकनीकी जानकारी नहीं देता, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी सींचता है

जब महिलाएं बनीं “जलवायु योद्धा”

ये महिलाएं अब केवल किसान नहीं हैं – ये “जलवायु योद्धा” हैं, जो आने वाले मौसम की मार को झेलने के लिए तैयार हैं। उनकी जागरूकता अब सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं, वे गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

इन महिलाओं ने यह दिखा दिया कि यदि उन्हें सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और मंच मिले, तो वे किसी भी आपदा को अवसर में बदल सकती हैं।

धामी सरकार का ‘विज़न 2030’: खेतों से क्लाइमेट एक्शन तक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहल को सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम मानना उसकी महत्ता को कम आंकना होगा। यह “सशक्त उत्तराखंड – समृद्ध किसान” अभियान का जीवंत उदाहरण है, जो नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि को एक साथ जोड़ता है।

यह कार्यक्रम भविष्य की खेती के लिए एक ‘टेम्पलेट’ बन सकता है – जहां खेती केवल जीविका नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी होगी; जहां महिलाएं केवल सहयोगी नहीं, नेतृत्वकर्ता होंगी।रुद्रपुर की इस पहल से यह साफ हो गया है – जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्या का हल गांव की चौपाल में भी खोजा जा सकता है, बस जरूरत है सही दिशा, नेतृत्व और भागीदारी की। और इसमें महिलाओं की भूमिका अब पीछे से नहीं, मंच के केंद्र में है।



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