उधम सिंह नगर में रहस्यमय ‘बांग्लादेशी’ निवासियों पर सवाल: चर्चा-अभियान कहाँ?

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उधम सिंह नगर में रहस्यमय ‘बांग्लादेशी’ निवासियों पर सवाल: चर्चा-अभियान कहाँ?


✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

उधम सिंह नगर जिले में लंबे समय से एक ऐसा सक्रिय लेकिन अव्यक्त विषय चल रहा है जिसमें बोला जाता है कि जिले में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। इसके साथ ही वहाँ मौजूद ‘बंगाली समुदाय’ की पुष्टि-स्थिति, उनकी संख्या तथा राजनीतिक असर-वोट बैंक के रूप में उनका इस्तेमाल — सब पर प्रश्न उठ रहे हैं। बावजूद इसके, ऐसा लगता है कि जन-स्मरण में इस विषय पर कोई व्यापक सार्वजनिक अभियान या बहस-मंच सक्रिय नहीं हुआ है।


क्या कह रही उपलब्ध जानकारी

  • एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तराखंड में “९ लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक” रह सकते हैं। यह आंकड़ा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है, लेकिन चर्चा को संकेत देता है कि संख्या कम नहीं हो सकती।
  • उधम सिंह नगर में एक मामला सामने आया है: गदरपुर में एक बांग्लादेशी महिला जिनके पास वीजा-पासपोर्ट की वैधता समाप्त हो चुकी थी, वहाँ लंबे समय तक रह रही पाई गई।
  • प्रदेश सरकार ने इस तरह के “अवैध विदेशी निवासियों” के खिलाफ अभियान चलाने का निर्णय लिया है: पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री ने अप्रैल 2025 में निर्देश दिए कि राज्य में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों की पहचान-जांच हो।
  • अभियान Operation Kalanemi के अन्तर्गत राज्य में अब तक लगभग 4 000 लोग सत्य-जांच के दायरे में आए, जिसमें उधम सिंह नगर में 167 सत्य-जांच और 17 गिरफ्तारी हुई।

सवाल-चिन्ह एवं चिंता के बिंदु

  • चर्चा यह है कि उधम सिंह नगर में बंगाली समुदाय की उपस्थिति काफी अधिक है — Reddit पर स्थानीय उपयोगकर्ता लिखते हैं: “In my area they all doing small business like selling fish, chickens, shops … created a whole Bengali ecosystem …”
    इस प्रकार सामाजिक-मानचित्र में यह समुदाय सक्रिय दिखता है।
  • लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस समुदाय में कितनी संख्या वैध नागरिकों की है और कितनी अवैध प्रवासियों की। मीडिया में “बहुत संख्या में बांग्लादेशी नागरिक” रहने की बातें हैं, लेकिन विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
  • राजनीतिक रूप से भी प्रश्न उठते हैं: यदि बड़ी संख्या में इस तरह की पहचान-वोट बैंक-स्थिति वाली आबादी है, तो क्या स्थानीय राजनीति में उसका प्रभाव है? क्या उनकी स्थिति को लेकर कोई गंभीर सार्वजनिक नीति या चर्चा हुई है?
  • प्रशासन-पुलिस-अभियानों के बावजूद यह लगता है कि “व्यापक अभियान” नहीं हुआ — स्थानीय जन-संवाद, समुदाय-साक्षात्कार, भू-राशि विवरण आदि कम दिखाई देते हैं।

निष्कर्ष

उधम सिंह नगर में मामला काफी संवेदनशील और जटिल है — एक ओर “बंगाली / संभवतः बांग्लादेशी निवासियों” की उपस्थिति है, दूसरी ओर उनकी स्थिति, संख्या व वैधता पर सार्वजनिक ज़ोरदार चर्चा या नीति-खाका प्रतीत नहीं होता। यह एक जनता-विषय बन सकता है — जहाँ स्थानीय नागरिक, प्रशासन व राजनीतिक दल इस पर खुली बहस करें।
आपके लेख के लिए सुझाव:

  • स्थानीय लोगों-व्यापारियों से साक्षात्कार लें कि क्या उन्होंने इस विषय पर बातचीत सुनी है।
  • जिला प्रशासन (SDM/DM कार्यालय) व स्थानीय पुलिस से रिपोर्ट/डेटा मांगे: कितने विदेशी नागरिक मिले, कितनों को हिरासत में लिया गया व क्या कार्रवाई हुई।
  • चुनावी क्षेत्रों में बंगाली-बंगाल-जड़ित मत-वोट-प्रवृत्ति पर शोध करें — क्या यह “वोट बैंक” के रूप में प्रयोग हो रहा है या नहीं।
  • वैध एवं अवैध प्रवासियों को अलग-अलग देखना ज़रूरी है, ताकि विश्लेषण निष्पक्ष हो।


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