हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) मनाया जाता है, ताकि दुनिया को इस घातक बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके…इसके बाद भी समाज में कई ऐसे लोग हैं, जो बिना कोई परवाह किए कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो जी का जंजाल बन जाती हैं.

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आज हम आपको समाज की एक ऐसी सच्चाई बता रहे हैं, जो सभ्यता का मुखौटा पहनकर चलने वाले सिस्टम की खोखली परतों को उधेड़ देती है. यह उस समाज की कहानी है, जिसकी जड़ों में भ्रष्टाचार और शोषण गहराई तक फैला है. ये कहानी उस बेबस और लाचार विधवा की है, जिसे मदद के नाम पर संरक्षण नहीं, बल्कि हवस की कीमत चुकानी पड़ी. बदले में 13 लोग उसी बीमारी की चपेट में आ गए, जिसका कोई इलाज नहीं है.ये पूरा मामला 2018 में सामने आया था, जिसने सभी को चौंका दिया था.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के भटहट ब्लॉक से सामने आया था. कहानी 28 साल विधवा की है. शादी के तीन साल बाद ही उसके पति की मौत हो गई थी. पति की मौत के बाद घर-परिवार से उसे सहारा नहीं मिला. लिहाजा वो राशन कार्ड और विधवा पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अधिकारियों के पास पहुंची, लेकिन हैरानी की बात ये है कि जहां उसे मदद मिलनी चाहिए थी, वहीं रोजगार सेवक और ग्राम प्रधान ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया. धीरे-धीरे ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी समेत लगभग 13 लोगों ने सरकारी सुविधाएं दिलाने का झांसा देकर महिला का शारीरिक शोषण किया.

जांच रिपोर्ट आते ही हड़कंप मच गया

लगातार शोषण झेल रही उस महिला जब तबीयत बिगड़ी तो ग्राम प्रधान उसे स्थानीय डॉक्टर के पास भेजा. जहां उसके खून की जांच की गई. रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महिला एचआईवी पॉजिटिव है, मतलब उसे एड्स है.जब उन्हें यकीन नहीं हुआ तो महिला का गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चेकअप कराया गया. जब एआरटी सेंटर यानी एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी की रिपोर्ट में भी HIV की पुष्टि हो गई तो फिर उन सभी सभी के होश उड़ गए, जिन्होंने उस महिला का शोषण किया था. फिर वे सभी डर के चलते जांच कराने पहुंचे और सभी 13 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए.

हवस के बदले मिला एड्स

जांच के बाद एआरटी सेंटर के कर्मचारियों ने महिला की काउंसिलिंग की, जहां उसने पूरी कहानी बयां की. पता चला कि पति की मौत से पहले ही उसे संक्रमण लग चुका था और वही आगे बढ़कर इन 13 लोगों तक पहुंच गया, जो आज भी उसी बीमारी से जूझ रहे हैं. यहां कहना गलत नहीं होगा कि ये बीमारी उनकी हवस का परिणाम बनकर लौटी थी.

इस घटना ना सिर्फ मानवता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह याद दिलाती है कि भ्रष्टाचार, शोषण और गलत इरादों का अंत हमेशा विनाश ही होता है. हमने इस घटना का जिक्र इसलिए भी किया है कि क्योंकि एड्स को लेकर लोगों को जागरुक होना बेहद जरूरी है. ये घटना बताती है कि कैसे अलग-अलग लोगों के साथ संबंध बाने से एड्स फैलता है.

कैसे फैलता है एड्स?

एड्स एक लाइलाज बीमारी है, जिसे मैनेज किया जा सकता है. यह ऐसी गंभीर बीमारी है, जिससे पीड़ित लोगों का बचना मुश्किल होता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि एड्स (HIV) मुख्य रूप से शारीरिक संबंध से फैलता है. अगर कोई व्यक्ति HIV संक्रमित है और उसके वीर्य, योनि द्रव या खून का संपर्क दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाए, तो संक्रमण हो सकता है. सेक्स के अलावा यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति की सुई या इंजेक्शन शेयर करने से भी फैल सकती है. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मां से बच्चे को संक्रमण हो सकता है.


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