

रुद्रपुर का एक हंसता-खेलता चेहरा, दोस्तों के बीच हर महफिल की जान, आज खामोश हो गया। रजत शर्मा मेड़ी अब हमारे बीच नहीं रहा। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे रजत ने हल्द्वानी के सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में अपनी अंतिम सांस ली।
यह सिर्फ एक मौत नहीं है, यह एक चेतावनी है… एक आईना है… जो समाज के उस कड़वे सच को दिखाता है, जिसे हम अक्सर “यारी-दोस्ती” और “मौज-मस्ती” के नाम पर नजरअंदाज कर देते हैं।
“यारों का यार” — लेकिन खुद से हार गया
रजत ऐसा युवक था, जो दोस्ती को सबसे ऊपर रखता था। यारों के लिए हर हद पार कर देता, घर-परिवार से भी टकरा जाता, लेकिन दोस्तों का साथ कभी नहीं छोड़ता।
हर महफिल में उसकी मौजूदगी, हर जाम में उसका नाम… धीरे-धीरे यही “यारी” उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई।
शराब, जो शुरुआत में सिर्फ एक शौक थी, कब आदत बनी और फिर लत बनकर उसके शरीर को खोखला करती चली गई — शायद रजत खुद भी नहीं समझ पाया।
बताया जाता है कि उसके फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हो चुके थे। इलाज चला, सुधार भी हुआ… लेकिन “यारों का यार” फिर महफिलों में लौट आया — चोरी-छुपे ही सही, पर जाम फिर छलकने लगे।
एक अधूरी जिंदगी, कई सवाल
आज रजत चला गया…
पीछे रह गई उसकी नवविवाहिता पत्नी, उसका परिवार, और ढेर सारे अधूरे सपने।
सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या यह मौत सिर्फ बीमारी से हुई?
या फिर यह उस “नशे की संस्कृति” की देन है, जिसे हम दोस्ती का नाम देकर बढ़ावा देते हैं?
युवाओं के नाम एक सख्त संदेश
रजत की कहानी कोई अकेली कहानी नहीं है।
रुद्रपुर ही नहीं, पूरे उत्तराखंड में “यारों की यारी” के नाम पर शराब और नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
सावधान हो जाइए…
हर पार्टी जरूरी नहीं होती
हर दोस्त सच्चा नहीं होता
और हर जाम सिर्फ मज़ा नहीं देता — कई बार मौत का रास्ता भी बनाता है
“चल दारू की पार्टी” वाली यारी, असल में आपको धीरे-धीरे मौत की ओर धकेल सकती है।
समय रहते संभलें
अगर आप नशा करते हैं —
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच सुविधाओं का लाभ लें
अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें
क्योंकि जब तक समझ आता है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है।
श्रद्धांजलि और संकल्प
ईश्वर से प्रार्थना है कि वह रजत शर्मा मेड़ी की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करें।
लेकिन सच्ची श्रद्धांजलि सिर्फ शब्दों से नहीं होगी —
सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी, जब कोई और “रजत” इस दलदल में डूबने से बच जाए।
(संपादकीय संदेश)
दोस्ती जिंदगी का खूबसूरत हिस्सा है…
लेकिन अगर वही दोस्ती आपको नशे, बीमारी और मौत की ओर ले जाए — तो ऐसी यारी से दूरी ही बेहतर है।
याद रखिए:
यारों का यार” बनना अच्छी बात है… लेकिन सबसे पहले “अपने जीवन का जिम्मेदार इंसान” बनना जरूरी है।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें…
कहीं अगला नंबर आपका न हो।





