मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 के साथ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(R) लगाई गई है। इस मामले में यह भी बात सामने आई की पूरे उत्तराखंड से 80 शिकायतें सामने आई थी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
नैनीताल के SSP मणिकांत मिश्रा ने मामले की जांच SP क्राइम जगदीश चंद्र को सौंपी है। SSP के मुताबिक, पुलिस को इस मामले में पूरे उत्तराखंड से करीब 80 शिकायतें मिलीं, इनमें 19 शिकायतें नैनीताल जिले से आई थीं। शिकायतों की कानूनी जांच के बाद अंजू की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। अंजू इस मामले में शिकायत दर्ज कराने वाली पहली व्यक्ति थीं।
शिकायतों की कानूनी जांच के बाद दर्ज हुआ केस
SSP मणिकांत मिश्रा ने ANI से बातचीत में बताया कि पुलिस के पास अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों से शिकायतें पहुंची थीं। इन सभी शिकायतों का कानूनी परीक्षण किया गया। इसके बाद हल्द्वानी कोतवाली में मुकदमा दर्ज करने का फैसला लिया गया। मामले की जांच अब SP क्राइम जगदीश चंद्र करेंगे। वह राजपत्रित अधिकारी हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
खरगे ने राज्यसभा में उठाया था मुद्दा
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में शुद्धीकरण का मामला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में उठाया था। 13 अगस्त को उन्होंने सदन में यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर मामले में FIR दर्ज करने में देरी पर सवाल उठाया था। खरगे ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि जिस स्थान पर उन्होंने रैली को संबोधित किया था वहां किया गया शुद्धीकरण संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इस तरह की प्रथा को छुआछूत से भी जोड़ा था।
