उत्तराखंड की राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो महज चुनावी जीत के लिए नहीं, बल्कि अपनी विकासपरक सोच और जन-सरोकारों के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और किच्छा विधानसभा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला एक ऐसा ही चमकता हुआ नाम हैं। आज जब हम किच्छा के बदलते स्वरूप, चौड़ी सड़कों, बड़े अस्पतालों और अत्याधुनिक औद्योगिक परियोजनाओं को देखते हैं, तो इसके पीछे राजेश शुक्ला की वर्षों की दूरदर्शी सोच और भगीरथ प्रयास साफ नजर आते हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष से लेकर उत्तराखंड विधानसभा के “जायंट किलर” बनने तक का उनका सफर प्रदेश की राजनीति में एक मिसाल है।साल 2017: जब किच्छा के ‘लाल’ ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को दी मातराजेश शुक्ला के राजनीतिक जीवन का सबसे ऐतिहासिक और टर्निंग पॉइंट साल 2017 का विधानसभा चुनाव रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य की दो सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों से दांव खेला था, जिसमें से एक सीट ऊधम सिंह नगर की किच्छा विधानसभा थी। पूरे देश और प्रदेश की मीडिया की नजरें इस सीट पर टिकी थीं। एक तरफ राज्य के मुख्यमंत्री की पूरी मशीनरी और लाव-लश्कर था, तो दूसरी तरफ किच्छा की जनता के सुख-दुख में चौबीस घंटे खड़े रहने वाले एक जमीनी नेता राजेश शुक्ला थे।इस बेहद कड़े और कशमकश भरे मुकाबले में राजेश शुक्ला ने अपनी अद्भुत संगठनात्मक क्षमता और जनता के अटूट विश्वास के बल पर इतिहास रच दिया। उन्होंने तत्कालीन सिटिंग मुख्यमंत्री हरीश रावत को उनके गढ़ में पटखनी देकर राजनीति के पंडितों को चौंका दिया। यह जीत केवल एक चुनाव की जीत नहीं थी, बल्कि यह किच्छा के स्वाभिमान और एक स्थानीय जनसेवक की निष्ठा की जीत थी। इस ऐतिहासिक जीत के बाद राजेश शुक्ला रातों-रात “जायंट किलर” के रूप में देश भर में मशहूर हो गए।
2017 से अब तक: किच्छा को ‘स्मार्ट और आधुनिक’ बनाने का संकल्पमुख्यमंत्री को हराने के बाद राजेश शुक्ला ने किच्छा की जनता के इस कर्ज को चुकाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। उनका एकमात्र लक्ष्य किच्छा को उत्तराखंड का सबसे विकसित और अग्रणी विधानसभा क्षेत्र बनाना था। साल 2017 से लेकर वर्तमान समय तक, भले ही राजनीतिक समीकरण बदले हों, लेकिन किच्छा के विकास के लिए राजेश शुक्ला की पैरवी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनका तालमेल क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुआ है। उनके इस पूरे कार्यकाल के कुछ सबसे बड़े और ऐतिहासिक विकास कार्य निम्नलिखित हैं:1. स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति: AIIMS सैटेलाइट सेंटर की सौगातकिच्छा और पूरे कुमाऊं मंडल के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बड़ा मील का पत्थर राजेश शुक्ला के प्रयासों से ही संभव हो पाया। उन्होंने किच्छा में एम्स (AIIMS) सैटेलाइट सेंटर की स्थापना के लिए लगातार पैरवी की। उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किच्छा में करीब 100 एकड़ भूमि पर 700 करोड़ रुपये की लागत से इस विशाल एम्स सैटेलाइट सेंटर को मंजूरी मिली और काम शुरू हुआ। यह अस्पताल न केवल किच्छा बल्कि आसपास के कई जिलों और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों लोगों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्रदान कर रहा है।किच्छा ग्रीनफील्ड सिटी और नॉलेज पार्क: भविष्य का महानगरराजेश शुक्ला की दूरदर्शी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण किच्छा में ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी और नॉलेज पार्क की महापरियोजना है। उनके प्रयासों से स्टेट हाईवे-74 पर रुद्रपुर के नजदीक अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) से जोड़ते हुए इस परियोजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस ग्रीनफील्ड सिटी और 200 से 250 एकड़ में फैले नॉलेज पार्क से क्षेत्र में करीब 7,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश आने का अनुमान है। इससे स्थानीय स्तर पर 50,000 से अधिक युवाओं को रोजगार और 2 लाख से अधिक लोगों को विश्वस्तरीय आवास की सुविधा मिलेगी।3. सड़कों का जाल और इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरणएक समय था जब किच्छा की सड़कें गड्ढों और ट्रैफिक जाम के लिए जानी जाती थीं। राजेश शुक्ला ने अपने कार्यकाल में सड़कों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी।नगला-किच्छा फोरलेन हाईवे: खुरपिया इंडस्ट्रियल क्लस्टर और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 10.6 किलोमीटर लंबे नगला-किच्छा मार्ग को 80 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से फोरलेन में अपग्रेड करने का प्रस्ताव पास कराया गया।आदित्य चौक से दीनदयाल चौक: शहर के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कराया गया ताकि किच्छा को एक आधुनिक शहर का रूप दिया जा सके।ग्रामीण सड़कें: नाबार्ड और राज्य योजना के अंतर्गत विधानसभा के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया, जिससे किसानों को अपनी फसल मंडी तक पहुंचाने में आसानी हुई।4. सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकार: भव्य कम्युनिटी हॉलकिच्छा चीनी मिल परिसर में लगभग 2 एकड़ भूमि पर 10 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक और भव्य कम्युनिटी हॉल का निर्माण कार्य राजेश शुक्ला की एक और बड़ी देन है। इस हॉल के बनने से क्षेत्र के मध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपने सामाजिक और मांगलिक कार्यक्रमों के लिए एक बेहद सस्ता और सर्वसुविधायुक्त स्थान मिल सका है।5. श्रमिक कल्याण और जनसेवा के प्रति निरंतरताविधायक पद पर रहते हुए या उससे इतर, राजेश शुक्ला ने कभी भी जनता से अपनी दूरी नहीं बनाई। आपदा के समय हो या सामान्य दिनों में, वे हमेशा लोगों के बीच सक्रिय रहते हैं। हाल ही में श्रम विभाग के माध्यम से किच्छा के पंजीकृत श्रमिकों के परिवारों को पोषण, शिक्षा और स्वच्छता किट वितरित करने जैसे जमीनी कार्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि वे समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की चिंता करते हैं।जनता के सुख-दुख के साथी: एक बेदाग और कर्मठ नेतृत्वराजेश शुक्ला की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी, सुलभता और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही है। किच्छा का कोई भी नागरिक आधी रात को भी अपनी समस्या लेकर उनके पास जा सकता है। उन्होंने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं बल्कि जनसेवा का जरिया माना है। अधिकारी वर्ग पर नियंत्रण रखने और क्षेत्र की जनता को उनका हक दिलाने के लिए वे कई बार प्रशासनिक स्तर पर भी मजबूती से लड़े हैं।किच्छा के स्वर्णिम काल के सूत्रधारहरीश रावत जैसी राजनीतिक शख्सियत को शिकस्त देने वाले राजेश शुक्ला ने पिछले सालों में किच्छा को जो पहचान दी है, उसकी गूंज पूरे उत्तराखंड में है। एम्स सैटेलाइट सेंटर, खुरपिया इंडस्ट्रियल हब और ग्रीनफील्ड सिटी जैसी योजनाएं आने वाले कई दशकों तक किच्छा की आर्थिकी और विकास की रीढ़ बनी रहेंगी।संक्षेप में कहें तो, राजेश शुक्ला का कार्यकाल और उनका राजनीतिक सफर किच्छा के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। वे केवल किच्छा के पूर्व विधायक नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की जनता के दिलों में बसने वाले एक ऐसे ‘विकास पुरुष’ हैं, जिन्होंने किच्छा के विकास को एक नई ऊंचाई और नई दिशा दी है। क्षेत्र की जनता आज भी उनके इन ऐतिहासिक कार्यों के लिए उनकी ऋणी है और उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताती है।
