उत्तराखंड को जोड़ते हुए खबर का एंगल
देश के नागरिकों की सुरक्षा से लेकर महिलाओं की सुरक्षा तक व्यवस्था पर सवाल—उत्तराखंड में भी अपराध की घटनाएं बढ़ा रही चिंता
रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना में शामिल भारतीय नागरिकों की मौत का आंकड़ा सामने आने से देश के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार 227 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किए गए, जिनमें 139 को सेवामुक्त किया जा चुका है, जबकि 51 भारतीयों की मौत की जानकारी सामने आई है। भारत सरकार शेष नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी के लिए रूस के साथ बातचीत कर रही है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
दूसरी ओर दिल्ली में चलती बस में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने महिला सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद कानूनों में व्यापक बदलाव और सख्ती के बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आना व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है।
उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। देवभूमि में महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर गंभीर घटनाएं सामने आती रही हैं। देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और अन्य जिलों में महिला अपराधों के मामले पुलिसिंग, निगरानी, सार्वजनिक परिवहन और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लगातार कठघरे में खड़ा करते हैं।
सवाल केवल कानून बनाने का नहीं, कानून के खौफ और उसके प्रभावी क्रियान्वयन का है। चाहे विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हो या देश के भीतर महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा—सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
