अष्टमी पर सेवा और श्रद्धा का संगम—महाराजा अग्रसेन चौक पर भंडारे संग कन्या पूजन

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रुद्रपुर। चैत्र नवरात्रि की पावन अष्टमी के अवसर पर शहर के महाराजा अग्रसेन चौक पर आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। भाजपा नेता एडवोकेट प्रमोद मित्तल एवं उनकी टीम द्वारा आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां कन्या पूजन के साथ सेवा कार्य को विशेष रूप से संपन्न किया गया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


कार्यक्रम की शुरुआत उद्योगपति संदीप अग्रवाल द्वारा भगवान शंकर-पार्वती, हनुमान जी एवं महाराजा अग्रसेन के विधिवत पूजन-अर्चन से हुई। इसके पश्चात कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया और उन्हें आदरपूर्वक प्रसाद व उपहार भेंट किए गए। इस धार्मिक आयोजन ने न केवल आस्था को सशक्त किया, बल्कि समाज में सेवा भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
संदीप अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के भंडारे और सेवा कार्य समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करते हैं। उन्होंने प्रमोद मित्तल और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
वहीं प्रमोद मित्तल ने स्पष्ट किया कि यह सेवा कार्य पूर्णतः निस्वार्थ भाव से किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि भंडारे में हर वर्ग के लोग भाग लेकर अपनी खुशियों को जरूरतमंदों के साथ साझा कर रहे हैं, जो सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण है।
अष्टमी के अवसर पर आयोजित कन्या पूजन में श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ भाग लिया और कन्याओं से आशीर्वाद प्राप्त किया। भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में स्वच्छता, अनुशासन और सेवा भाव का विशेष ध्यान रखा गया।
इस अवसर पर श्रीओम अग्रवाल, कुशल अग्रवाल, अशोक सिंह नेगी, प्रमोद यादव, शिवांश अग्रवाल, अमन अग्रवाल, राजेश कामरा, अंकित शर्मा, मनीष मित्तल, नितिन अग्रवाल, अनुज अग्रवाल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे सेवा कार्य निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।
(संपादकीय दृष्टि):आज के समय में जब समाज विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे सेवा-आधारित धार्मिक आयोजन सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सहयोग, सह-अस्तित्व और मानवीय संवेदनाओं को पुनर्जीवित करने का माध्यम बनते जा रहे हैं।


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