धूमधाम से निकला माँ अटरिया का डोला, आस्था और विकास का संगम बना रुद्रपुर

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रुद्रपुर। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर रुद्रपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माँ अटरिया का डोला इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ निकाला गया। रम्पुरा क्षेत्र से गाजे-बाजे और भक्तिमय माहौल के बीच शुरू हुई यह डोला यात्रा नगर की आस्था और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आई।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


डोला यात्रा में स्थानीय विधायक शिव अरोरा स्वयं शामिल हुए और उन्होंने भक्तों के साथ कंधा देकर डोले को उठाया। यह दृश्य न केवल आस्था का प्रतीक था, बल्कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच जुड़ाव का भी सशक्त संदेश देता नजर आया।
आस्था का केंद्र—प्राचीन अटरिया मंदिर
विधायक शिव अरोरा ने कहा कि रुद्रपुर का प्राचीन अटरिया माता मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। यहां दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि माँ अटरिया की डोला यात्रा इसी आस्था की जीवंत परंपरा है, जो हर वर्ष और अधिक भव्य रूप लेती जा रही है।
विकास और व्यवस्था पर भी फोकस
संपादकीय दृष्टिकोण से देखें तो इस धार्मिक आयोजन के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास की झलक भी साफ दिखाई दी। विधायक ने जानकारी दी कि त्रिशूल चौक से अटरिया मंदिर मोड़ तक सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले वर्ष जब डोला यात्रा निकलेगी, तब यह मार्ग पूरी तरह विकसित हो चुका होगा और जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी।
यह बयान न केवल विकास के वादों को दर्शाता है, बल्कि धार्मिक आयोजनों को सुगम और सुरक्षित बनाने की प्रशासनिक जिम्मेदारी की भी याद दिलाता है।
आस्था और राजनीति का संतुलन
डोला यात्रा में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी नई बात नहीं है, लेकिन यह आवश्यक है कि धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक मंच बनने से बचाया जाए। इस आयोजन में जहां एक ओर श्रद्धा का सागर उमड़ा, वहीं दूसरी ओर विकास के वादों की गूंज भी सुनाई दी—जो एक स्वस्थ लोकतांत्रिक संतुलन की ओर संकेत करता है।
जनसहभागिता बनी ताकत
इस अवसर पर गिरीश पाल, नाथूलाल गुप्ता, गीता शर्मा, सौरभ गुप्ता, शुभम, वीरेंद्र शर्मा, सुग्रीम राव, मनोज मदान, राधेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। डोला यात्रा ने एक बार फिर यह साबित किया कि रुद्रपुर की पहचान केवल एक औद्योगिक शहर की नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भी है।


माँ अटरिया का यह भव्य डोला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विकास के त्रिवेणी संगम का प्रतीक है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे आयोजनों की पवित्रता बनी रहे और इनके साथ जुड़ी व्यवस्थाएं भी समय के साथ मजबूत होती जाएं—ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।


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