रुद्रपुर। भाजपा की ओर से भूत बंगला स्थित रामलीला मैदान में आयोजित सामाजिक सौहार्द संकल्प धरने में सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया गया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर एससी समाज को हिंदू समाज से अलग करने का कथित प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाजपा के इस दावे के बीच रुद्रपुर में देसी, दलित और बंगाली समाज से जुड़े लोगों की ओर से कई गंभीर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के संपादक अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि सामाजिक सौहार्द का वास्तविक अर्थ मंचीय भाषणों से आगे बढ़कर गरीब की दुकान, ठेली, रोजगार और घर की सुरक्षा से जुड़ता है।
उन्होंने कहा कि रुद्रपुर में सड़क चौड़ीकरण, स्मार्ट सिटी और अन्य विकास कार्यों के दौरान छोटे दुकानदारों और मेहनतकश परिवारों पर कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठे हैं। देसी समाज के ठेली कारोबारियों, टुकटुक चालकों तथा छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार को कार्रवाई और पुनर्वास से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए।
अवतार सिंह बिष्ट ने भाजपा से जुड़े रहे नंदलाल के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि दशकों तक संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता के प्रतिष्ठान पर कार्रवाई का मुद्दा भी जनता के बीच चर्चा का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक कार्यकर्ता के अधिकार और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए समान व्यवस्था क्यों दिखाई देनी चाहिए।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट बंगाली समाज को उत्तराखंड की सामाजिक और आर्थिक शक्ति बताते हुए कहा कि तराई के विकास में इस समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। किसी भी कार्रवाई में जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव की धारणा पैदा होने की स्थिति में सरकार को पारदर्शी नीति के साथ जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
बिष्ट ने ट्रांजिट कैंप, भूत बंगला, खेड़ा, शिवनगर और कल्याणी नदी क्षेत्र को लेकर स्थानीय लोगों की आशंकाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि संभावित कार्रवाई, प्रभावित परिवारों, पुनर्वास, वैकल्पिक रोजगार और कानूनी स्थिति को लेकर स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा कि दलित, देसी और बंगाली समाज किसी राजनीतिक दल का वोट बैंक नहीं, लोकतंत्र के बराबर नागरिक हैं। चुनाव के समय सम्मान और समर्थन मांगने वाली राजनीति को पांच वर्षों तक जनता के अधिकारों की भी चिंता करनी होगी।
अवतार सिंह बिष्ट ने लोगों से बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान, समानता और अधिकारों के विचारों को अपनाने तथा अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता को जाति और दल से ऊपर उठकर अपने घर, रोजगार, सम्मान, शिक्षा और अधिकार के सवाल पर जनप्रतिनिधियों से हिसाब मांगना चाहिए।
रुद्रपुर। क्या रुद्रपुर की राजनीति में सम्मान का पैमाना आर्थिक है और चुनावी उपयोग का पैमाना गरीब समाज? यह सवाल आज देसी, दलित और बंगाली समाज के बीच तेजी से उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि महापौर विकास शर्मा और विधायक शिव अरोड़ा की राजनीति में बड़े कारोबारी और पूंजीपति वर्ग को विशेष महत्व मिलता है, जबकि देसी, दलित और बंगाली समाज को चुनावी नारों, भीड़ और समर्थन तक सीमित रखा जाता है।
सवाल यह है कि चुनाव के समय जिन हाथों से नारे लगवाए जाते हैं, उन्हीं मेहनतकश परिवारों के घर और प्रतिष्ठान कार्रवाई की जद में आएं तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी कहां है?
रुद्रपुर में सड़क चौड़ीकरण, विकास परियोजनाओं और अतिक्रमण कार्रवाई को लेकर छोटे दुकानदारों, ठेली कारोबारियों और मेहनतकश परिवारों की शिकायतें सामने आती रही हैं। दूसरी ओर प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को लेकर जनता के मन में अलग व्यवहार की धारणा बन रही है।
उन्होंने कहा—“सामाजिक सौहार्द का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब गरीब की दुकान सुरक्षित होगी, मेहनतकश का रोजगार सुरक्षित होगा, दलित को सम्मान मिलेगा और बंगाली समाज अपने घर और भविष्य को लेकर आश्वस्त होगा।”
