इसके लिए विशेष एप्लीकेशन विकसित की जा रही है।
सभी प्रभागीय वनाधिकारियों (डीएफओ) के माध्यम से इसके परीक्षण और फिर सुझाव लेने के बाद यह प्रणाली लागू की जाएगी। इससे न केवल जंगलों में अतिक्रमण समेत अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली भी हाईटेक होगी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
अतिक्रमण की जद में है 9,836.33 हेक्टेयर वन भूमि
71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाले उत्तराखंड में वन भूमि पर अतिक्रमण एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आया है। राज्य में वर्ष 2018-19 में कुल अतिक्रमित वन क्षेत्र 11,396.64 हेक्टेयर दर्ज किया गया। इसके बाद जून, 2024 से प्रारंभ हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत अभी तक 1,560.31 हेक्टेयर भूमि कब्जामुक्त कराई जा चुकी है।
अभी भी 9,836.33 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण की जद में है। इनमें कई मामले न्यायालयों, राष्ट्रीय हरित अधिकरण में विचाराधीन हैं। इस सबके बीच वन भूमि को कब्जामुक्त कराने को वन विभाग ने आधुनिक तकनीकी के उपयोग का निर्णय लिया है।
विशेष एप्लीकेशन से सामने आएगी सही तस्वीर
मुख्य वन संरक्षक एवं अतिक्रमण हटाओ अभियान के नोडल अधिकारी डा. पराग मधुकर धकाते के अनुसार वन भूमि पर अतिक्रमण की सटीक टोह लेने के दृष्टिगत विकसित की जा रही विशेष एप्लीकेशन को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है, जो उपग्रह से प्राप्त चित्रों और ड्रोन डाटा का विश्लेषण कर वन भूमि में किसी भी बदलाव या अवैध निर्माण को तुरंत पकड़ लेगी।
एआई की निगरानी से लापरवाही या मिलीभगत की गुंजाइश खत्म
यह व्यवस्था लागू करने से पहले सभी डीएफओ से इसका गहन परीक्षण कराया जाएगा। उनसे प्राप्त सुझावों के आधार पर एप्लीकेशन में जरूरी सुधार कर इसे प्रदेशभर में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एआई आधारित इस निगरानी प्रणाली के लागू होने से लापरवाही या मिलीभगत की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
रिमोट सेंसिंग और एआई तकनीक के जरिए दूरदराज के संवेदनशील वन क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी हो सकेगी। इससे भविष्य में नए अतिक्रमण पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकेगी।
