रुद्रपुर। रुद्रपुर के सामाजिक कार्यकर्ता के.पी. गंगवार ने उत्तराखंड सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक में रुद्रपुर के नजूल एवं ट्रांजिट कैंप के दान पात्र निवासियों को मालिकाना हक देने के प्रस्ताव से बाहर रखने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उधम सिंह नगर के बिंदुखत्ता तथा देहरादून के बापूग्राम और पक्का यौवन क्षेत्र के निवासियों को मालिकाना हक देने का प्रस्ताव कैबिनेट से मंजूर हो गया, जबकि रुद्रपुर के हजारों परिवारों को इसमें शामिल नहीं किया गया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
के.पी. गंगवार ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले सार्वजनिक मंच से रुद्रपुर के नजूल निवासियों को मालिकाना हक देने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में कैबिनेट प्रस्ताव में रुद्रपुर का नाम शामिल न होना शहरवासियों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्थानीय विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठा पाएंगे।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों से विधानसभा, लोकसभा और नगर निकाय चुनावों में नजूल भूमि पर मालिकाना हक प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा है। इसके बावजूद आज तक इस दिशा में कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। गंगवार ने नजूल और ट्रांजिट कैंप के निवासियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर प्रभावी पहल नहीं हुई, तो हजारों परिवारों के आशियानों पर संकट गहरा सकता है।
