पंतनगर यूनिवर्सिटी में बीटेक छात्र ने फांसी लगाकर दी जान, छात्रावास में मचा हड़कंप

Spread the love


पंतनगर। पंतनगर यूनिवर्सिटी से शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

जानकारी के अनुसार मृतक छात्र की पहचान नीरज पुत्र छोटेलाल निवासी दरऊ, किच्छा के रूप में हुई है। नीरज ने इसी साल पंतनगर यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी परिसर में दाखिला लिया था और वह बिपिन सिंह रावत छात्रावास के कमरा नंबर 75 में रह रहा था। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे उसके फांसी लगाकर आत्महत्या करने की खबर सामने आई।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और छात्रावास का दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा। इसके बाद घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फिलहाल आत्महत्या के पीछे के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है।

पुलिस की जांच
थाना पंतनगर पुलिस के अनुसार मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। शुरुआती जांच में यह मामला मानसिक तनाव या निजी कारणों से जुड़ा हो सकता है। पुलिस छात्र के मोबाइल और अन्य सामान को खंगाल रही है ताकि आत्महत्या की वजह का पता लगाया जा सके।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारी भी छात्रावास पहुंचे। प्रशासन ने छात्र की मौत पर गहरा दुख जताया और कहा कि पूरे मामले की जांच में पुलिस को सहयोग दिया जाएगा। साथ ही छात्रों को आश्वस्त किया गया कि उनकी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर यूनिवर्सिटी ठोस कदम उठाएगी।

छात्रों में मातम का माहौल
बीटेक प्रथम वर्ष का छात्र होने के कारण नीरज की पहचान यूनिवर्सिटी में अभी नई ही बनी थी, लेकिन अचानक हुई इस घटना से छात्रावास और यूनिवर्सिटी परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। छात्रावास के अन्य छात्र भी सदमे में हैं और अपने साथी की मौत को लेकर भावुक दिखाई दिए।

फिलहाल पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना दे दी है। उनके पहुंचने के बाद ही आत्महत्या के पीछे की असली वजहों पर प्रकाश डाला जा सकेगा।

जीबी पंत विश्वविद्यालय के बीटेक के छात्र की खुदकुशी का कारण सिर्फ अंग्रेजी भाषा से असहजता से उपजा तनाव था या इस आत्मघाती कदम की ओर ले जाने में अंग्रेजी न जानने वालों के प्रति कुछ खास वर्ग का उपेक्षित रवैया भी कारण बना होगा। कठिन आर्थिक हालत से जूझकर एक फलों का ठेला लगाने वाले का बेटा हिंदी मीडियम से 76 फीसदी अंक के साथ इंटरमीडिएड पास कर देश के सबसे पुराने कृषि विश्वविद्यालय में प्रवेश पाता है। ऐसे में आखिर महज 23 दिन में ऐसे क्या हालात बन गए कि उसने दुनिया छोड़ने का ही फैसला कर डाला। यह एक बड़ा सवाल है।



Spread the love