बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की गलियों, गंगा घाटों की ठंडी हवाओं और छात्र जीवन की सादगी से होकर निकलीं जस्टिस सुशीला कार्की ने नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है . यह न सिर्फ नेपाल के लिए गौरव का क्षण है , बल्कि वाराणसी और बीएचयू के लिए भी गर्व की बात है . लगभग 50 साल पहले जब वह यहां पढ़ाई करने आई थीं , तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वही छात्रा आगे चलकर नेपाल की राजनीति और न्यायपालिका में इतना ऊंचा मुकाम हासिल करेगी .

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बीएचयू की छात्रा से नेपाल की नेता तक

वर्ष 1975 में राजनीति विज्ञान से एमए करने वाली सुशीला कार्की का छात्र जीवन बेहद अनुशासित और अध्ययनशील रहा. वे हॉस्टल से विभाग तक रोजाना साइकिल या पैदल जाती थीं और ज्यादातर समय लाइब्रेरी में गुजारती थीं. क्लास खत्म होते ही गंगा घाटों का रास्ता पकड़ लेना उनकी आदत थी. गंगा किनारे की शांति और घाटों पर होने वाली मंत्रोच्चार की गूंज उन्हें बेहद भाती थी. प्रो. भूपेंद्र विक्रम सिंह, जो बीएचयू में लंबे समय तक नेपाली केंद्र के समन्वयक रहे, बताते हैं कि उस दौर में नेपाल से कई नेता और छात्र यहां आते थे. कोइराला परिवार, डिप्टी पीएम यादव और सांसद अक्सर आते रहते थे.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

वाराणसी की यादें

सुशीला कार्की के लिए बनारस सिर्फ पढ़ाई का ठिकाना नहीं, बल्कि जीवन के कई रंगों को समझने का स्थान भी था. गर्मियों की रातें जब हॉस्टल की छत पर चांदनी के नीचे सोना पड़ता, तो घाट से आती गंगा की हवा उनके जीवन में एक ताजगी भर देती. उन्होंने बाद में एक इंटरव्यू में कहा भी था गंगा किनारे बिताए गए दिन मेरे दिल में हमेशा रहेंगे. वे मुझे शक्ति और संतुलन देते हैं.


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