रुद्रपुर। देवभूमि की आत्मा उसकी संस्कृति और परंपराओं में बसती है, और जब वही परंपरा धरातल पर साकार होती दिखे, तो वह आयोजन संदेश बन जाती है। आदि कैलाश यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के जत्थे का रुद्रपुर में हुआ भव्य स्वागत इसी संदेश का सशक्त उदाहरण है। महापौर विकास शर्मा की अगुवाई में जिस तरह पुष्प वर्षा, धार्मिक उद्घोषों और आत्मीय भाव से यात्रियों का अभिनंदन किया गया, उसने “अतिथि देवो भव” की भावना को पुनः जीवंत कर दिया।
मॉडल कॉलोनी स्थित भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील ठुकराल के आवास से लेकर त्रिशूल चौक तक जिस श्रद्धा और उत्साह के साथ यात्रियों का स्वागत हुआ, वह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि रुद्रपुर की पहचान बनता जा रहा है। महापौर विकास शर्मा, अमरनाथ जी सेवा मंडल के अध्यक्ष अजय चड्डा, धीरेंद्र मिश्रा, हिमांशु शुक्ला, राकेश सिंह, तरुण दत्ता, राजन राठौर, सुरेश छाबड़ा, गुलशन छाबड़ा, मन्नू चुघ, निशांत ढल्ला, अंकित नरूला, अजय लूथरा, अमित अरोरा, अरुण बठला और आदित्य छाबड़ा सहित सभी कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने जिस समर्पण के साथ इस आयोजन को सफल बनाया, वह सराहनीय है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
यह स्वागत केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि देवभूमि की उस परंपरा का निर्वहन है, जिसमें दूर-दराज से आए अतिथि को देवतुल्य माना जाता है—
“अतिथि देवो भवः”
अर्थात् अतिथि ही देवता के समान होता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि रुद्रपुर जैसे प्रवेश द्वारों पर इस प्रकार के स्वागत कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते रहें। इससे न केवल श्रद्धालुओं का मनोबल बढ़ता है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक छवि भी देश-विदेश में मजबूत होती है। महापौर विकास शर्मा द्वारा इस परंपरा को बढ़ावा देना निस्संदेह प्रशंसनीय पहल है।
रुद्रपुर को यदि वास्तव में कुमाऊं का आध्यात्मिक प्रवेश द्वार बनाना है, तो इस प्रकार के आयोजनों को केवल एक दिन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक सतत परंपरा का रूप देना होगा। उत्तराखंड के हर नागरिक को यह संकल्प लेना चाहिए कि “अतिथि देवो भव” केवल श्लोक नहीं, बल्कि जीवन का आचरण बने।
देवभूमि की यही पहचान है, यही उसकी शक्ति है — और रुद्रपुर ने एक बार फिर इसे साबित कर दिखाया।

