सतपुली पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप, युवक की आत्महत्या के बाद HKP का प्रदर्शन, SSP को सौंपा ज्ञापन

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पौड़ी, 06 मई 2026।जनपद पौड़ी गढ़वाल के सतपुली क्षेत्र में एक युवक की आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। हिमालय क्रांति पार्टी (HKP) ने इस घटना को गंभीर पुलिस उत्पीड़न का परिणाम बताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पौड़ी को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


प्रदेश महासचिव डॉ. दिनेश सिंह बिष्ट के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सतपुली थानाध्यक्ष सहित संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता धारा 108 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।
क्या है मामला?
बताया जा रहा है कि सतपुली थाना क्षेत्र के ग्राम रैतपुर निवासी 20 वर्षीय युवक पंकज ने 02 मई 2026 को कथित रूप से पुलिस प्रताड़ना से तंग आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सुसाइड नोट के अनुसार—
बाइक को गलत तरीके से सीज किया गया
युवक को घसीट-घसीट कर पीटा गया
थाने में परिजनों के सामने अपमानित किया गया
गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया गया
इन आरोपों ने स्थानीय लोगों और राजनीतिक संगठनों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
SSP कार्यालय में नहीं मिले अधिकारी
HKP प्रतिनिधिमंडल जब ज्ञापन देने SSP कार्यालय पहुंचा, तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस क्षेत्राधिकारी दोनों अनुपस्थित मिले। ऐसे में ज्ञापन SSP के PRO को पढ़कर सौंपा गया।
यमकेश्वर कैंप कार्यालय को लेकर नाराजगी
पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि SSP मुख्यालय पौड़ी में नियमित रूप से नहीं बैठते और अधिकतर कार्य यमकेश्वर में कैंप कार्यालय से संचालित करते हैं, जिससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
HKP का अल्टीमेटम
हिमालय क्रांति पार्टी ने प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि—
यदि थानाध्यक्ष के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई
और SSP मुख्यालय में नियमित रूप से नहीं बैठे
तो पार्टी SSP कार्यालय के बाहर उग्र धरना-प्रदर्शन करेगी।
पुलिस कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ज्ञापन में पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पुलिस का व्यवहार “मित्र पुलिस” की अवधारणा के विपरीत होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पुलिस का रवैया पूर्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की तरह कठोर और अपमानजनक दिखाई देता है।
HKP नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाया जाएगा, जिसमें पुलिस की कार्यप्रणाली और व्यवहार को चुनौती दी जाएगी।

हिमालय क्रांति पार्टी के पदाधिकारियों ने सतपुली प्रकरण को आधार बनाते हुए उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी कई घटनाओं में पुलिस के अमानवीय व्यवहार, मारपीट, गाली-गलौज और फरियादियों के साथ अपमानजनक रवैये की शिकायतें सामने आती रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि थानों में न्याय मांगने पहुंचे लोगों के साथ संवेदनशीलता के बजाय कठोरता और दबाव की नीति अपनाई जाती है, जिससे आम जनता में भय का माहौल बन रहा है। सतपुली के युवक पंकज की आत्महत्या को भी इसी कड़ी का हिस्सा बताते हुए कहा गया कि यदि समय रहते पुलिस का व्यवहार सुधार लिया जाता, तो ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सकता था।
पार्टी पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद “मित्र पुलिस” की जो अवधारणा स्थापित की गई थी, वह धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है और कई मामलों में पुलिस का रवैया पुराने दौर की दमनकारी छवि को दर्शाता है।
उन्होंने मांग की कि पुलिस तंत्र में जवाबदेही तय हो, दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।


ज्ञापन देने वाले प्रमुख लोग
इस दौरान जिला महासचिव पपेंद्र सिंह रावत, नगर उपाध्यक्ष सुरेश चमोली, नगर महासचिव विपिन कुकरेती, सूरज सिंह नेगी और शिव कुमार पांडेय सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यह मामला अब केवल एक आत्महत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।


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