रुद्रपुर भारतीय संस्कृति की आत्मा मानी जाने वाली गुरु-शिष्य परंपरा, आधुनिक दौर की तेज रफ्तार और भौतिकतावादी लहरों के बीच भी जीवित है। ऊधमसिंह नगर में पतंजलि महिला योग समिति द्वारा गुरु पर्व पर आयोजित गुरु सम्मान कार्यक्रम इसका जीवंत प्रमाण है।
यह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उस परंपरा का उत्सव था, जिसने भारत को हजारों वर्षों तक आध्यात्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से मजबूत बनाए रखा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जिस तरह गुरु और शिष्य के संबंधों की मर्यादा और महत्व पर प्रकाश डाला, वह न केवल आज की पीढ़ी के लिए, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणास्पद है।
गौरतलब है कि ऋषि-मुनियों के युग में ही नहीं, आज भी गुरुजन अपने ज्ञान को निस्वार्थ भाव से समाज के हित में अर्पित कर रहे हैं। योग गुरु स्वामी रामदेव द्वारा हर घर तक योग की अलख जगाने का संकल्प और उसी भावना को आगे बढ़ातीं पतंजलि महिला योग समिति की सदस्याएँ समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रही हैं।
कार्यक्रम में जानकी ओली, हँसी बिष्ट, चंद्रकला बम, दया डसिला, प्रेमा कुंवर, कुसुम नारंग, प्रेमलता राठौर, किरन बोरा, गीता बिष्ट, माया परिहार, पार्वती परिहार, बिद्या शर्मा, आशा जोशी, रेखा चन्द आदि की सक्रिय उपस्थिति इस बात का संकेत है कि महिलाओं में भी योग और भारतीय परंपराओं को जीवित रखने की अद्भुत ललक है।
ऐसे आयोजन न केवल गुरुजन को सम्मानित करते हैं, बल्कि समाज में संस्कृति, अनुशासन और आत्मिक उन्नति की चेतना को प्रबल करते हैं। पतंजलि महिला योग समिति ने यह सिद्ध किया है कि गुरु-शिष्य परंपरा महज अतीत की विरासत नहीं, बल्कि आज के समय की भी अनिवार्य ज़रूरत है। समाज को चाहिए कि ऐसे आयोजनों को और प्रोत्साहन दे, ताकि नई पीढ़ी भी इस परंपरा से प्रेरणा ले सके।
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