नैनीताल। उत्तराखंड में हाईकोर्ट की शिफ्टिंग के लिए चीफ जस्टिस ऋतु बाहरी की खंडपीट ने कहा है कि प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की राय भी बहुत आवश्यक है। इसलिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 14 मई 2024 तक एक पोर्टल खोलने का निर्देश दिया गया है। इस पोर्टल में अधिवक्ता यदि उच्च न्यायालय के स्थानांतरण के लिए इच्छुक हैं तो हां, चुनकर अपनी पसंद देने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि वे रुचि नहीं रखते हैं तो अपनी नामांकन संख्या, तिथि और हस्ताक्षर दर्शाकर नहीं लिखेंगे। इसी तरह वादकारी भी इस पोर्टल में अपनी राय दे सकते हैं, जो 31 मई तक दी जानी आवश्यक है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल इस आशय की सूचना को गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों सहित उत्तराखंड राज्य के पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रसार वाले स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित करने के भी निर्देश दिए हैं। इस मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से भी जगह चिंहित करने को कहा गया है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया है जिसमें प्रमुख सचिव, विधायी और संसदीय कार्य, प्रमुख सचिव, गृह, दो वरिष्ठ अधिवक्ता, उत्तराखंड राज्य बार काउंसिल द्वारा नामित एक सदस्य, बार काउंसिल ऑफ इंडिया से अध्यक्ष और एक अन्य इसके सदस्य होंगे। यह समिति संबंधित पक्षों की राय लेने के बाद 7 जून 2024 तक सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपेगी। इसके बाद हाईकोर्ट की स्थापना के लिए उपयुत्तफ भूमि के बारे में सरकार की सिफारिश और विकल्पों के परिणाम को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा। इस मामले में कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए 25 जून की तिथि नियत की है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को आहूत की गई बैठक में अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट की बेंच की शिफ्टिंग की पहल का विरोध किया है। तय किया गया कि सोमवार को बार सभागार में एक और बैठक की जाएगी। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने व्यापक जनहित को आधार मानकर नैनीताल से हाईकोर्ट को शिफ्ट किया जाना आवश्यक बताया है। गौरतलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट की एक बेंच आईडीपीएल ऋषिकेश भेजने के मौखिक आदेश देने के अगले दिन बृहस्पतिवार को कुमाऊंभर के अधिवक्ता भड़क गए। अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट बेंच शिफ्टिंग का अलग-अलग तरीके से विरोध जताया। बृहस्पतिवार को सीएम पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी पहुंचे। यहां बार एसोसिएशन अध्यक्ष किशोर पंत के नेतृत्व में बार पदाधिकारी सीएम से मिले। उन्होंने सीएम से कहा कि उत्तराखंड छोटा राज्य है, यहां हाईकोर्ट की दो बेंच बैठाने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों के बार एसोसिएशन भी हाईकोर्ट की शिफ्टिंग को लेकर जंहा अलग अलग विकल्प प्रस्तुत कर रहे हैं जबकि कुमांऊं मंडल के अधिवक्ताओं के कई वर्ग भी नैनीताल हाईकोर्ट को हटाने के विरोध में एकजुट हो रहे है। जबकि कई अधिवक्ता ऊधमसिंहनगर जनपद में भी सुविधापूर्ण स्थान बता रहे है।
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