केंद्र में भले ही एनडीए की सरकार बन गई है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों से अलग-अलग जगहों पर पार्टी के खराब प्रदर्शन से अंदरखाने में एक-दूसरे के प्रति नेताओं में असंतोष साफ झलक रहा है.

केंद्र में भले ही एनडीए की सरकार बन गई है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों से अलग-अलग जगहों पर पार्टी के खराब प्रदर्शन से अंदरखाने में एक-दूसरे के प्रति नेताओं में असंतोष साफ झलक रहा है.

केंद्र में भले ही एनडीए की सरकार बन गई है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों से अलग-अलग जगहों पर पार्टी के खराब प्रदर्शन से अंदरखाने में एक-दूसरे के प्रति नेताओं में असंतोष साफ झलक रहा है.

दरअसल, उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी की कार्यसमिति की बैठक में बिल्कुल अलग माहौल नजर आया, जिसमें प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने संबोधित किया. तीरथ सिंह रावत के भाषण की हर बात पर जमकर तालियां बजी थीं. उत्तराखंड भाजपा कार्यसमिति की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने धामी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि फैसले सलाह-मशविरा से होने चाहिए और भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है. उनका निशाना दलबदलुओं पर माना जा रहा है. इस बीच मुख्यमंत्री धामी ने ‘शेर की खाल में भेड़िए’ वाले बयान से हलचल मचा दी है.

पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि पार्टी नेताओं को याद रखना चाहिए कि वे कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत के कारण हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाताओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. पता चला है कि भाजपा ने रावत को पौड़ी लोकसभा सीट से टिकट देने से इनकार कर दिया, जिसका उन्होंने पिछली लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया था.

रावत ने कहा कि पार्टी को नेताओं को थोपना नहीं चाहिए. बल्कि पहले हितधारकों और कार्यकर्ताओं से परामर्श किया जाना चाहिए. सीएम के रूप में, तीरथ सिंह रावत को चार महीने के भीतर वर्तमान सीएम पुष्कर सिंह धामी द्वारा बदल दिया गया था. रावत ने कहा कि धामी अगले 15 साल तक पद पर बने रहेंगे. प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक काफी हंगामेदार रही. एक के बाद एक स्पीकर कठोर बातें कहते रहें.

हिंदुस्तान Global Times/print media,शैल ग्लोबल टाइम्स,अवतार सिंह बिष्ट, उत्तराखंड

वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में क्षेत्र और जाति के आधार पर बांटने की मंशा रखने वाले कुछ लोगों को चेतावनी दी. उन्होंने उनकी तुलना शेर की खाल वाले “भेड़िया” से की. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भी अपने संबोधन में थोड़े तल्ख नजर आए. हाल ही में बद्रीनाथ विधानसभा उपचुनाव में हार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केदारनाथ के लिए अगला उपचुनाव हर कीमत पर जीता जाना चाहिए, उन्होंने रेखांकित किया कि केदारनाथ सिर्फ एक अन्य विधानसभा सीट नहीं है. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री के गौरव से जुड़ा है.

केंद्र में भले ही एनडीए की सरकार बन गई है लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों से अलग-अलग जगहों पर पार्टी के खराब प्रदर्शन से अंदरखाने में एक-दूसरे के प्रति नेताओं में असंतोष साफ झलक रहा है.
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