उत्तराखंड में कक्षा 6 से 8 तक के पाठ्यक्रम में एक नया टॉपिक जुड़ने वाला है। मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगौली ने संवाददाताओं को बताया कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन का इतिहास और इसकी लोक संस्कृति के विभिन्न आयामों को कक्षा 6 से 8 तक के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

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ऐसा निर्णय सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।

मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगौली ने कहा कि कक्षा 6 से 8 तक के पाठ्यक्रम में सहायक पुस्तिका के रूप में ‘हमारी विरासत और विभूतियां’ को शामिल किया जाएगा। यह निर्णय उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास और इसकी लोक संस्कृति के विभिन्न आयामों को स्कूली पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने की मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा करने करने की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।

कैबिनेट ने 2025 के लिए नई आबकारी नीति को भी मंजूरी दी है। इस नीति के तहत धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानें बंद की जाएंगी। यही नहीं शराब की बिक्री पर नियंत्रण रखा जाएगा। इसमें जन संवेदनशीलता को सर्वोच्च महत्व दिया जाएगा। नई नीति में उप-दुकानों और मेट्रो शराब बिक्री प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है।

यही नहीं नई आबकारी नीति में एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने वाली दुकानों के लाइसेंस रद्द करने का भी प्रावधान किया गया है। उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर भी एमआरपी लागू होगी। बीते दो वर्षों के दौरान राज्य के आबकारी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

यही नहीं अगले वित्तीय वर्ष के लिए 5,060 करोड़ रुपये के आबकारी राजस्व लक्ष्य रखा गया है। नई नीति में पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों के लिए आबकारी शुल्क से छूट दी गई है। थोक शराब के लाइसेंस केवल उत्तराखंड निवासियों को ही जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना में नए प्रावधान शामिल करने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स। दिनेश बम रुद्रपुर, (उत्तराखंड)

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पुस्तिका में छात्र-छात्राएं श्रीदेव सुमन, तीलू रौतेली समेत कई महान विभूतियों के बारे में पढ़ेंगे। वहीं, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी यह पुस्तिका एक आधार बनेगी। इस पुस्तक के माध्यम से बच्चों को चौंदकोट जनशक्ति मार्ग की गाथा भी पढ़ने को मिलेगी। पुस्तक निर्माण में समन्वयक सुनील भट्ट बताते हैं कि पौड़ी जिले में 33 किमी का यह मार्ग सामुदायिक सहभागिता और श्रमदान का बड़ा उदाहरण है। इसके साथ ही वर्ष 1951 में टिहरी जिले के बूढ़ाकेदार की साझा चूल्हे की कहानी भी इस पुस्तिका के माध्यम से बच्चों को पढ़ने को मिलेगी।


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