

हजारों वर्षों से ऋषि-मुनियों द्वारा साधना में प्रयुक्त यह मंत्र न केवल आत्मा की शुद्धि करता है, बल्कि मस्तिष्क को जाग्रत और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने में भी अद्भुत रूप से कारगर माना गया है।

संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट
क्या है गायत्री मंत्र?
गायत्री मंत्र यजुर्वेद के प्रसिद्ध ऋचाओं में से एक है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद (मंडल 3, सूक्त 62, मंत्र 10) में भी मिलता है। यह मंत्र इस प्रकार है:
“ॐ भूर् भुवः स्वः।
तत् सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥”
इस मंत्र का भावार्थ है –
“हे परम ऊर्जा के स्रोत, सविता देव! आप के उस दिव्य तेज को हम अपने ध्यान में रखते हैं। वह तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।”
गायत्री मंत्र और मानसिक शुद्धि
गायत्री मंत्र का नियमित जप आपके मन को स्थिर करता है। इसमें उच्चारित ध्वनि तरंगें सीधे आपके मस्तिष्क के अल्फा वेव्स को प्रभावित करती हैं। जब कोई व्यक्ति शांत अवस्था में इस मंत्र का जाप करता है, तो यह तनाव, क्रोध और चंचलता को शांत कर देता है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि कुछ विशेष ध्वनियां और कंपन मस्तिष्क की न्यूरल एक्टिविटी को प्रभावित करती हैं, जिससे डोपामिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन का स्तर संतुलित होता है।
मस्तिष्क की शक्ति को जागृत करता है
गायत्री मंत्र में कुल 24 अक्षर होते हैं, जिन्हें वेदों में मानव शरीर के 24 प्रमुख ऊर्जा केंद्रों (नाड़ियों) से जोड़ा गया है। जब कोई व्यक्ति श्रद्धा और सटीक उच्चारण के साथ इस मंत्र का जप करता है, तो ये ऊर्जा केंद्र सक्रिय होते हैं, जिससे शरीर और मस्तिष्क में संतुलन आता है। यह न केवल स्मरण शक्ति को बढ़ाता है, बल्कि एकाग्रता, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को भी मजबूत करता है।
आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति
गायत्री मंत्र केवल बाह्य रूप से नहीं, बल्कि आंतरिक रूप से भी व्यक्ति को शुद्ध करता है। यह मंत्र चेतना स्तर को ऊपर उठाता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। इसे ‘मंत्र की माँ’ कहा जाता है क्योंकि यह आत्मा को ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ता है। जब कोई साधक इस मंत्र का नियमित जाप करता है, तो वह अहंकार, लालच, मोह जैसे नकारात्मक भावों से मुक्त होता जाता है।
वैज्ञानिक शोध भी देते हैं प्रमाण
हाल के वर्षों में कई अनुसंधानों में यह पाया गया है कि जो लोग प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करते हैं, उनके मस्तिष्क की गतिविधि में सकारात्मक परिवर्तन आता है। इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस द्वारा किए गए एक शोध में यह सामने आया कि गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने वालों की कॉर्टेक्स एक्टिविटी अधिक संतुलित रहती है और उनमें तनाव सहने की क्षमता अधिक होती है।
कब और कैसे करें जाप?
गायत्री मंत्र का जाप सूर्योदय और सूर्यास्त के समय करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। जाप करते समय शांत वातावरण में बैठकर ध्यानपूर्वक और स्पष्ट उच्चारण के साथ इस मंत्र को 108 बार जपने की परंपरा है। जाप के दौरान मन को एकाग्र रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि आप यह मंत्र नित्य जीवन का हिस्सा बना लेते हैं, तो मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन निश्चित है।
खासकर बच्चों, विद्यार्थियों और साधना करने वाले साधकों के लिए गायत्री मंत्र एक अनमोल वरदान की तरह कार्य करता है। यह मंत्र केवल धार्मिक उच्चारण नहीं, बल्कि चेतना को जाग्रत करने वाली ब्रह्म-ध्वनि है।
गायत्री मंत्र का अर्थ और महत्व
सबसे पहले समझना ज़रूरी है कि गायत्री मंत्र क्या है और इसमें छिपा अर्थ क्या है:
बच्चों के लिए क्यों लाभकारी है गायत्री मंत्र?
बचपन में मन और मस्तिष्क अत्यंत कोमल होते हैं और उस समय दी गई शिक्षा जीवनभर साथ रहती है। अगर बच्चे प्रतिदिन सुबह या रात को गायत्री मंत्र का जप करते हैं, तो:
उनके मन में स्थिरता आती है और वे मानसिक रूप से अधिक मजबूत बनते हैं।
यह मंत्र उनकी स्मरण शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाता है, जिससे वे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
बच्चों के मन से भय, शंका और असुरक्षा की भावना दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
वे बचपन से ही धार्मिक और नैतिक मूल्यों को समझने लगते हैं।
विद्यार्थियों के लिए अद्वितीय वरदान
आज की प्रतिस्पर्धा भरी दुनिया में विद्यार्थियों को हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गायत्री मंत्र उनके लिए मानसिक सहारा बन सकता है:
गायत्री मंत्र के नियमित जप से बुद्धि और विवेक का विकास होता है। विद्यार्थी कठिन विषयों को समझने और याद रखने में सक्षम बनते हैं।
यह मंत्र पढ़ाई के तनाव को कम करता है और मनोबल को मजबूत करता है।
सुबह या शाम को पढ़ाई से पहले 5 मिनट तक मंत्र जाप करने से दिमाग शांत और केंद्रित रहता है।
परीक्षा के समय डर, घबराहट और नकारात्मक सोच को दूर करने के लिए यह मंत्र एक मजबूत आत्मिक सहारा बनता है।
साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग
जो लोग ध्यान, योग या किसी भी प्रकार की आध्यात्मिक साधना में लगे होते हैं, उनके लिए गायत्री मंत्र एक उर्जा-स्रोत है:
गायत्री मंत्र का उच्चारण शरीर के सात चक्रों को सक्रिय करता है और साधक को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
यह मंत्र मन, प्राण और आत्मा – तीनों को संतुलन प्रदान करता है, जिससे साधक की साधना अधिक गहन और प्रभावशाली हो जाती है।
नियमित जप से भीतर की नेगेटिविटी खत्म होती है और दिव्यता प्रकट होती है।
साधक के भीतर दृढ़ निष्ठा, शुद्ध संकल्प और भक्ति भावना उत्पन्न होती है।




