रुद्रपुर,उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब “भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस” की बात कही थी, तो शायद बहुतों ने इसे एक राजनैतिक नारा समझा होगा। लेकिन बीते साढ़े चार वर्षों में विजिलेंस की लगातार सक्रियता और साहसिक कार्रवाइयों ने यह सिद्ध कर दिया कि सरकार अब सिर्फ “कहने” में नहीं, “करने” में यकीन रखती है। यही कारण है कि राज्य में विजिलेंस के ट्रैप और गिरफ्तारी आंकड़े न केवल बढ़े हैं, बल्कि कोर्ट में दोष सिद्ध होने की दर 71% तक पहुंच गई है — जो खुद में एक बड़ी उपलब्धि है।
संख्याएं बोलती हैं: ट्रैप और गिरफ्तारियों का रिकॉर्ड?82 ट्रैप, 94 गिरफ्तारियां, जिसमें 13 राजपत्रित अधिकारी भी शामिल।125 शिकायतें, जिनमें 82 में कार्रवाई, 18 में सामान्य जांच और 25 खुली जांच।71 प्रतिशत मामलों में सजा, जो विजिलेंस की मजबूत जांच और पैरवी को दर्शाता है।
“बड़े मगरमच्छों” को भी नहीं बख्शा गया
सिर्फ छोटे बाबुओं पर शिकंजा नहीं, बल्कि कई हाई-प्रोफाइल अधिकारी भी विजिलेंस के जाल में फंसे:नैनीताल: लोनिवि के AE ₹10,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार
- हरबर्टपुर: यूपीसीएल JE ₹15,000 लेते दबोचे गए रामनगर: एलआईयू के निरीक्षक और मुख्य आरक्षी गिरफ्तार
- काशीपुर: रोडवेज AGM ₹90,000 रिश्वत लेते धरे गए हरिद्वार: खंड शिक्षा अधिकारी ₹10,000 की रिश्वत लेते पकड़े गए
- देहरादून: GST सहायक आयुक्त ₹75,000 लेते दबोचे गए
- रुद्रपुर: जिला आबकारी अधिकारी 10% कमीशन में गिरफ्तार
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश: भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध?मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कथन बहुत कुछ कहता है:
“देवभूमि को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है। सुशासन की कार्य संस्कृति ही हमारा मिशन है।”यही वजह है कि विजिलेंस को खुली छूट, टोल फ्री नम्बर 1064 जैसी व्यवस्था, और सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि:
- ट्रैप मामलों में प्रशासनिक कार्यवाही तेजी से की जाए
- आरोपियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से दूर रखा जाए
- अभियोजन में देरी न हो
अब अगला कदम क्या? – संपत्ति जांच सबसे जरूरी?अब सवाल यह उठता है कि अगर सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना चाहती है तो क्या केवल ट्रैप और सजा पर्याप्त हैं?
उत्तर है: नहीं।
जो अधिकारी वर्षों से सिस्टम को चूना लगाते आ रहे हैं, वे बहुत चतुर होते हैं। वे रिश्वत नकद में नहीं, किसी एजेंट या “डमी व्यक्ति” के खाते से लेते हैं।
ऐसे में उनकी संपत्ति की जांच ही एकमात्र तरीका है जिससे “दूध का दूध, पानी का पानी” हो सकता है।
सम्पत्ति जांच क्यों जरूरी है?अधिकारियों की घोषित संपत्ति बनाम वास्तविक आय में फर्क सामने आएगा।
- फर्जी नामों पर खरीदी गई संपत्तियां, ज़मीनें, गाड़ियाँ, निवेश पकड़े जा सकेंगे।
- पूर्व में ट्रैप से बचे अधिकारी जो वर्षों से “सिस्टम के खिलाड़ी” हैं, उनका पर्दाफाश हो सकेगा।
भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड का रोडमैप
| क्र. | कदम | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | विजिलेंस को संसाधन बढ़ाना | आधुनिक उपकरण, साइबर ट्रैकिंग |
| 2 | संपत्ति जांच अभियान | विशेष जांच दल द्वारा सभी संवेदनशील पदों पर |
| 3 | ट्रैप के साथ-साथ आय से अधिक संपत्ति मामलों पर फोकस | प्रिवेंशन फर्स्ट अप्रोच |
| 4 | ट्रांसफर-पोस्टिंग में पारदर्शिता | ई-ट्रांसफर नीति का कड़ाई से पालन |
| 5 | आमजन की सहभागिता | शिकायत का सरल और सुरक्षित तरीका |
जनता का संदेश: अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, हराम की कमाई जब्त करो?जनता यह जानती है कि भ्रष्टाचार सिर्फ एक गिरफ्तारी या जेल तक सीमित नहीं है। असली लड़ाई है उस हराम की कमाई को जब्त करने, उजागर करने, और न्याय की अदालत में पेश करने की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल निश्चित रूप से एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है। लेकिन अगर इस लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाना है, तो केवल ट्रैप और गिरफ्तारी नहीं, अब जरूरी है –
“हर भ्रष्ट अधिकारी की संपत्ति की गहन जांच, और बेनामी संपत्तियों को जब्त करने की कार्यवाही।”तभी जाकर “भ्रष्टाचार मुक्त देवभूमि” की कल्पना साकार हो पाएगी।
अवतार सिंह बिष्ट,लेखक हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स संवाददाता )
