ग्राम पंचायत जवाहर नगर वार्ड संख्या 09 आज एक चौराहे पर खड़ा है—एक ओर उम्मीदों की लौ है, तो दूसरी ओर विघटन की छाया। ग्रामीणों की समस्याएं विकराल रूप ले चुकी हैं। टूटी-फूटी सड़कें, नालियों की दुर्दशा, जल निकासी की अव्यवस्था, बिजली की अनियमित आपूर्ति, और सबसे भयावह—नशे का बढ़ता प्रभाव। जिस जवाहर नगर को कभी एक शांत, उन्नत और भाईचारे से भरा हुआ वार्ड माना जाता था, वह अब धीरे-धीरे असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।
ऐसे विषम समय में जब ग्राम समाज को एक सशक्त, सजग और सेवाभावी नेतृत्व की आवश्यकता है, तब पूर्व सैनिक मोहन सिंह भंडारी का वार्ड सदस्य पद हेतु चुनाव लड़ना, केवल एक औपचारिक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत है।
कौन हैं मोहन सिंह भंडारी?
मोहन सिंह भंडारी भारतीय सेना के एक अनुशासित, ईमानदार एवं देशभक्त पूर्व सैनिक हैं, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने जीवन के स्वर्णिम वर्ष समर्पित किए। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने केवल विश्राम को नहीं चुना, बल्कि समाज सेवा को अपने जीवन का दूसरा उद्देश्य बनाया। अपने वार्ड की समस्याओं को लेकर उन्होंने लगातार प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों तक आवाज़ पहुंचाई है।
वह हमेशा ग्रामीणों के साथ खड़े रहे हैं—कभी राशन घोटालों के विरुद्ध आवाज़ उठाई, कभी जल आपूर्ति की समस्या पर अधिकारियों से मिलकर समाधान की कोशिश की। आज जब अधिकांश जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के वक्त दिखाई देते हैं, मोहन भंडारी उन बिरले लोगों में हैं जो हर दिन, हर संकट में जनता के बीच खड़े नजर आते हैं।
पूर्व सैनिक मोहन सिंह भंडारी, भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशी, को रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, महापौर विकास शर्मा, विधायक शिव अरोड़ा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। उनका संकल्प है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों को मजबूत करना और जवाहर नगर वार्ड का समग्र विकास सुनिश्चित करना। राष्ट्रसेवा से समाजसेवा की ओर बढ़ते भंडारी जी की कर्मठता, ईमानदारी और सेवा भावना को देखते हुए जनता से अपील है कि ‘आम’ चुनाव चिन्ह पर मोहर लगाकर उन्हें भारी मतों से विजयी बनाएं।
क्यों ज़रूरी है मोहन भंडारी का चुनाव जीतना?
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अनुशासन और ईमानदारी का प्रतीक:
भारतीय सेना का अनुभव भंडारी जी को अनुशासन, समयबद्धता और जिम्मेदारी का सच्चा परिचायक बनाता है। गांव की अव्यवस्था को एक सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता है, और वह नेतृत्व भंडारी जी में देखा जा सकता है।
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विकास के प्रति समर्पण:
टूटी सड़कों, गंदगी, जलभराव और बिजली की किल्लत जैसी समस्याएं किसी भी गांव की रीढ़ तोड़ सकती हैं। भंडारी जी ने पहले ही वादा किया है कि वे इन सभी समस्याओं के समाधान हेतु पंचायत और ब्लॉक स्तर पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
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नशा मुक्त वार्ड का संकल्प:
वर्तमान में जवाहर नगर की सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को नशे की गर्त से निकालना है। भंडारी जी इस मुद्दे को सबसे प्रमुख मानते हैं और उनकी योजना है कि गांव में जनजागरूकता अभियान चलाकर नशे के विरुद्ध सामाजिक आंदोलन छेड़ा जाए।
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अपराधियों की शरणस्थली नहीं, संस्कारों का गाँव:
जब जनप्रतिनिधि ईमानदार होते हैं, तब अवैध गतिविधियाँ खुद समाप्त हो जाती हैं। यह देखा गया है कि गांवों में अपराध, शराब बिक्री, और असामाजिक तत्वों को पनाह तब मिलती है जब चुने हुए प्रतिनिधि मौन रहते हैं या भागीदार बन जाते हैं। मोहन भंडारी इस संस्कृति को जड़ से समाप्त करना चाहते हैं।
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शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता:
भंडारी जी का विजन स्पष्ट है—प्राथमिक स्कूलों की दशा सुधारना, बच्चों को मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म दिलवाना, और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति को बेहतर करना।
