

रुद्रपुर। शहर के जगतपुरा क्षेत्र में शनिवार रात एक परिवार पर संगठित गिरोह ने जानलेवा हमला कर दिया। घटना में घर के मालिक, उसके पुत्र सहित कई लोग घायल हो गए। आरोप है कि हमलावरों ने न सिर्फ घर में पथराव और तोड़फोड़ की, बल्कि फायरिंग कर दहशत भी फैलाई। इस दौरान महिला के कपड़े फाड़कर जेवर व मोबाइल छीन लिया गया, वहीं घर के बाहर खड़े वाहन भी क्षतिग्रस्त कर दिए गए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जगतपुरा निवासी निसार अहमद ने थाना डॉजिट कैंप में तहरीर देकर बताया कि शनिवार रात लगभग 10 बजे उसके पुत्र साजिद का विवाद मोहल्ले के फैजान व साथियों से हुआ था। हालांकि, स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया। लेकिन देर रात लगभग 11 बजे फैजान व उसके समर्थक अकरम हान, इशरत अली, फरमान, फुरकान, शकील, चन्दू, गुल मोहम्मद, सोयल, शनिफ, मेहनाज, इशरत अली का दामाद निवासी सितारगंज समेत 3–4 अन्य लोग अवैध हथियारों से लैस होकर उनके घर पर हमला करने पहुंच गए।
पीड़ित का आरोप है कि हमलावरों ने घर पर जमकर पथराव किया, जिसमें वह स्वयं, उसका पुत्र साजिद और रिश्तेदार अबरार घायल हो गए। राह चलते रोहित व अशोक यादव नामक युवक भी पथराव में घायल हो गए। इस दौरान हमलावरों ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए और घर के बाहर खड़ी दो मोटरसाइकिल व एक स्कूटी को क्षतिग्रस्त कर दिया।
हद तो तब हो गई जब बचाव में चिल्ला रही निसार की पत्नी अकीला के कपड़े फाड़ दिए गए और उसका मोबाइल फोन, कान के टॉप्स व गले का पेंडिल छीन लिया गया। हमलावरों ने निसार के पुत्र साजिद का विवो V-27 मोबाइल भी छीन लिया, जो घटना की वीडियो बनाने का प्रयास कर रहा था।
घटना की सूचना पर पुलिस को कॉल की गई और मोहल्ले के लोग जुटे तो हमलावर फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए। पीड़ित परिवार ने घायल अवस्था में आवास विकास चौकी पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना से अवगत कराया। सभी घायलों को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया।
निसार अहमद ने तहरीर में आरोप लगाया है कि हमलावर संगठित गिरोह बनाकर इस प्रकार की वारदातें अंजाम देते हैं और कई के खिलाफ पहले से आपराधिक इतिहास भी दर्ज है। पीड़ित ने जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संपादकीय लेख:अपराध मुक्त उत्तराखंड की परिकल्पना को चुनौती”उधमसिंह नगर की जगतपुरा कॉलोनी में बीती रात घटी घटना ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह केवल एक पारिवारिक झगड़ा नहीं था, बल्कि संगठित आपराधिक प्रवृत्ति का भयावह प्रदर्शन था। आधी रात को दर्जनों लोग अवैध हथियारों से लैस होकर किसी के घर पर हमला बोल दें, पथराव, तोड़फोड़, महिलाओं के साथ अभद्रता, लूटपाट और हवाई फायरिंग करें—और यह सब पुलिस चौकी से कुछ ही दूरी पर हो—तो फिर “भयमुक्त उत्तराखंड” की बात एक खोखला नारा ही प्रतीत होती है।

उत्तराखंड राज्य के निर्माण की मूल भावना थी एक ऐसा शांत, सुरक्षित और विकासशील प्रदेश जहां नागरिक बिना भय के जीवन जी सकें। लेकिन उधमसिंह नगर की धरती पर बाहरी राज्यों से आए आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने डेरा जमा लिया है। धीरे-धीरे इनकी जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि ये खुलेआम स्थानीय लोगों को धमकाने, जान से मारने की कोशिश करने और संपत्ति नष्ट करने तक से बाज नहीं आ रहे। इससे भी ज्यादा चिंता का विषय है कि इनका दुस्साहस अब पुलिस को ही सीधी चुनौती देने लगा है।
सीसीटीवी कैमरे तोड़ना, हवाई फायरिंग करना और राह चलते निर्दोष लोगों तक को घायल करना, यह सब दर्शाता है कि अपराधियों को न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की चिंता। यदि ऐसी घटनाएं रातों-रात कॉलोनियों में घटने लगें तो आम नागरिक का विश्वास पुलिस और शासन पर कैसे कायम रह सकेगा?
अब समय आ गया है कि उधमसिंह नगर पुलिस इस घटना को “सामान्य मारपीट” का मामला मानकर ठंडे बस्ते में डालने के बजाय इसे संगठित अपराध की तरह ले। स्थानीय स्तर पर गहन जांच होनी चाहिए कि आखिर इन अपराधियों को संरक्षण कौन दे रहा है और इन्हें हथियार उपलब्ध कहां से हो रहे हैं। उत्तराखंड को “सुरक्षित प्रदेश” बनाए रखने के लिए पुलिस को अपनी कार्यशैली में कठोरता लानी होगी।
यह संपादकीय इस बात पर जोर देता है कि सरकार और पुलिस प्रशासन को अपराधियों के हौसले पस्त करने होंगे। यदि ऐसे गिरोहों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो अपराध मुक्त उत्तराखंड की परिकल्पना केवल एक सपना बनकर रह जाएगी। प्रदेश की जनता अब यह उम्मीद करती है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और यह संदेश स्पष्ट जाए कि देवभूमि की शांति को भंग करने वालों के लिए यहां कोई स्थान नहीं।
यह खबर प्रथम पक्ष के तहरीर के आधार पर प्रकाशित की गई है




