

नेपाल की राजधानी काठमांडू में बीते मार्च में ही राजशाही की वापसी और हिंदू राज्य की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन विरोध प्रदर्शन के पीछे केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ नाराजगी भी साफ दिखाई दी। नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र सिंह भी खासे सक्रिय दिखाई दिए। तो आइए जानते हैं कि नेपाल का शाही परिवार अभी कहां है और क्या कर रहा है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह
साल 2008 में राजशाही के खत्म होने के बाद से पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह एक आम नागरिक की तरह देश में रह रहें हैं। ज्ञानेंद्र शाह का मुख्य निवास काठमांडू में निर्मल निवास है, लेकिन साल 2024 की शुरुआत में, वे कथित तौर पर शहर के बाहरी इलाके, नागार्जुन पहाड़ियों में, हेमंताबास नामक फार्म हाउस नुमा घर में रह रहे थे।
मार्च में, ज्ञानेंद्र शाह पोखरा से काठमांडू लौटे और हजारों राजशाही समर्थकों ने उनका स्वागत किया। उन्हें और उनके परिवार को निर्मल निवास ले जाया गया। मई में, उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों और अपने पोते हृदयेंद्र के साथ नारायणहिती शाही महल का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान, शाही परिवार ने महल परिसर में पूजा भी की।
राजमाता रत्ना
राजमाता रत्ना पूर्व शाही महल परिसर महेंद्र मंजिल में रहती हैं। राजपरिवार के युवा सदस्य नेपाल छोड़कर विदेश में रहते हैं। पूर्व युवराज पारस और राजकुमारी हिमानी की बेटी, राजकुमारी कृतिका शाह, जुलाई 2008 में नेपाल छोड़कर अपने परिवार समेत सिंगापुर में बस गईं। उनकी बड़ी बहन, राजकुमारी पूर्णिका शाह, भी 2008 से नेपाल छोड़कर सिंगापुर में रह रही हैं।
कैसे भड़का नेपाल की जनता का गुस्सा?
दरअसस लोकतंत्र की बहाली से देश के युवा वर्ग को उम्मीद थी कि उनका जीवन पहले से बेहतर होगा, लेकिन नेपाल की विभिन्न लोकतांत्रिक सरकारें लोगों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सकीं। साथ ही बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने लोगों को निराश किया तो भ्रष्टाचार और वंशवादी राजनीति ने जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया। हाल ही में जैसे ही नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया, वैसे ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और युवा वर्ग सड़कों पर उतर आया। सरकार ने सख्ती से निपटने की कोशिश की, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार को जनता का आक्रोश दिखा और सरकार को न सिर्फ सत्ता से बेदखल किया बल्कि संसद भवन, सिंह दरबार जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं में भी आग लगा दी।




