उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों की पुकार – अधूरे सपनों का हिसाब कौन देगा?

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नैनिताल,होटल खुर्पाताल इन में आयोजित राज्य आन्दोलनकारियों की बैठक ने एक बार फिर उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जिनके लिए उत्तराखण्ड राज्य का जन्म हुआ था। बैठक की अध्यक्षता आन्दोलनकारी प्रभात ध्यानी ने की और इसमें बड़ी संख्या में वरिष्ठ आन्दोलनकारियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

बैठक में बोलते हुए राज्य आन्दोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष गणेश सिंह बिष्ट ने स्पष्ट कहा कि आज भी उत्तराखण्डवासी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं। खेत-खलिहान भूस्खलन से प्रभावित हैं, पशुधन और घरों का नुकसान लगातार हो रहा है। मगर राहत देने वाले अधिकारी केवल नियम-कानूनों का हवाला देकर मुआवजा बाँटने की खानापूर्ति कर रहे हैं। ग्रामीणों का जीवन-यापन कठिन होता जा रहा है।

नैनीताल जनपद की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, योजनाओं का भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप न बनना और पलायन की तेज़ होती रफ्तार, सभी वक्ताओं की चिंता का विषय रहे। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार पूरी तरह असफल दिखाई दी। गाँव खाली हो रहे हैं, पर किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं होती।

सभा में एक स्वर से यह आह्वान किया गया कि यदि राजधानी, पलायन, भू-कानून, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की समस्याओं का स्थायी समाधान चाहिए तो 2027 में सत्ता के केन्द्र में क्षेत्रीय ताकतों को लाना होगा। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल योजनाएँ और समेकित विकास का मॉडल ही राज्य को बचाने का रास्ता है।

इस मौके पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती देवकी बिष्ट और खुर्पाताल ग्रामसभा की प्रधान श्रीमती हंसी नेत्री को उनकी जीत पर सम्मानित किया गया। अध्यक्षता कर रहे प्रभात ध्यानी ने सरकार को चेताया कि आन्दोलनकारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन उम्मीदों और सपनों के साथ यह राज्य बना है, जिन शहीदों की शहादत पर यह उत्तराखण्ड खड़ा है, उन्हें साकार करने के लिए बड़ा आन्दोलन होगा।

सभा का संचालन डॉ. सुरेश आलाश्रेणी ने किया। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। सभी आन्दोलनकारी एकजुट होकर राज्य विरोधी ताकतों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष छेड़ेंगे और नया इतिहास लिखेंगे।

बैठक को भुवन जोशी, कमलेश चन्द्र पाण्डे, हुकुम सिंह कुँवर, पान सिंह रिजवाली, मनमोहन कनवाल, डॉ. मनोज बिष्ट, मुकेश जोशी, शाकिर अली, जीवन सिंह नेगी, खड़क सिंह बगड़वाल, पान सिंह रौतेला, श्रीमती तृप्ति बोरा, रहीस भाई और महेश जोशी ने सम्बोधित किया। गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के जनगीतों की प्रस्तुति ने आन्दोलनकारियों में नया उत्साह भर दिया।

अंत में कर्मचारी नेता जी.सी. उप्रेती ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।


यह सम्पादकीय स्पष्ट करता है कि उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों की पीड़ा अब केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई है। यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में एक नया जनान्दोलन जन्म ले सकता है।



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