दुनिया के सबसे क्रूर आतंकी संगठन ISIS की ‘जन्नत’ में महिलाओं का नर्क जैसा जीवन जीना पड़ता है. यहां भारतीय लड़कियां सोशल मीडिया के जाल में फंसकर बेची जाती हैं. यह खुलासा हुसैन जैदी फाइल्स पॉडकास्ट में किया गया.

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मशहूर क्राइम जर्नलिस्ट हुसैन जैदी के इस एपिसोड में रिसर्चर करिश्मा ने इराक, सिरिया, खोरासान और अफगानिस्तान की छिपी हुई महिलाओं की नीलामी मंडियों का खौफनाक राज खोला.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

करिश्मा, जो दो बार इराक गई हैं और एनजीओ-पुलिस के साथ काम करती हैं, ने बताया कि ये मंडियां गुप्त जगहों पर लगती हैं, जहां लाल-नीली कालीन बिछाकर 20-25 मर्द इकट्ठा होते हैं. महिलाओं को बालों से घसीटकर लाया जाता है. इसके बाद स्टेज पर खड़ा कर उनकी बोली लगाई जाती है. अगर आपको इनकी कीमत का पता चलेगा तो आपके होश उड़ जाएंगे. इन लड़कियों को महज 50 डॉलर (करीब 4,250 रुपये) में बेच दिया जाता है. ये रेट वर्जिन लड़कियों का है. गैर-कुंवारी के लिए कीमत दो हजार तक कम कर दी जाती है.

किए कई शॉकिंग खुलासे
करिश्मा ने खुलासा किया कि भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी लड़कियां विशेष रूप से निशाने पर हैं. सोशल मीडिया पर भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर लड़कियों को ललचाया जाता है. कोई दिल टूटने पर चैट रूम्स में दोस्ती करती हैं. इसके बाद फोटो एक्सचेंज होते हैं. फर्जी प्यार का वादा किया जाता है. जैसे ही सामने वाले लड़के को पता चलता कि ये लड़की इमोशनली कमजोर है, तो उसका ब्रेनवॉश शुरू हो जाता है. स्कॉलरशिप, पढ़ाई का खर्च या शादी का लालच दिखाकर भारत से लड़कियों को ‘एक्सपोर्ट’ किया जाता है. विदेश पहुंचकर या तो उन्हें बेच दिया जाता या सुसाइड बॉम्बर बनाया जाता है. ISIS का मानना है कि भारतीय महिलाओं की नस्ल कमजोर है. वो लड़ाई नहीं लड़ सकती हैं, सिर्फ बम बांधकर उड़ा सकती हैं. वहीं अरब महिलाओं को फाइटर बनाया जाता है.https://www.instagram.com/reel/DKZ0Y91y7FX/embed/captioned/?cr=1&v=14&wp=978&rd=https%3A%2F%2Fapi-news.dailyhunt.in&rp=%2F#%7B%22ci%22%3A0%2C%22os%22%3A155.19999998807907%7D

भारत से हर साल बेची जाती हैं कई महिलाएं
करिश्मा के रिसर्च से साफ है कि यह ‘भर्ती’ नहीं, बल्कि ट्रैफिकिंग है. 2014 में अबू बकर अल-बगदादी के नेतृत्व में ISIS ने महिलाओं को टारगेट करना शुरू किया था. भारत में 2015 में 21-27 लोग (महिलाएं सहित) भर्ती हुए थे. इसमें कश्मीर, यूपी, महाराष्ट्र, साउथ इंडिया से महिलाएं लाई गई थी. लेकिन 2024 में इसमें उछाल आया. जनवरी में 28, फरवरी 37, मार्च 36, अप्रैल 68 लड़कियां शामिल हुई. ये आंकड़े एटीएस रिपोर्ट्स के मुताबिक है.


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