यह यात्रा जिन जिलों से होकर गुज़री, उन इलाक़ों में भी महागठबंधन का प्रदर्शन उतना ही कमजोर रहा जितना राज्य के अन्य हिस्सों में।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में निकाली गई थी। दावा किया गया था कि यह यात्रा लोकतंत्र की रक्षा का व्यापक अभियान बनेगी, मगर परिणामों ने इस दावे को सियासी भ्रम साबित कर दिया।
में जहाँ यात्रा की शुरुआत हुई, वहाँ महागठबंधन को करारी हार मिली। राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार सतेंद्र शाह को राष्ट्रीय लोक मोर्चा की स्नेहलता ने मात दी।
इसके बाद यात्रा का दूसरा बड़ा पड़ाव था—यहाँ भी कांग्रेस और राजद दोनों को निराशा हाथ लगी। पर तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम तक चुनाव हार गए।
शहर में राहुल गांधी की उपस्थिति वाली सभा को कांग्रेस ने टर्निंग पॉइंट बताया था, लेकिन नतीजों में भाजपा के वरिष्ठ नेता व मंत्री प्रेम कुमार ने फिर से विजय हासिल कर यह दावा खारिज कर दिया।
यात्रा में और अन्य इलाक़ों में भारी भीड़ जुटी थी, मगर यह भीड़ वोटों में तब्दील नहीं हो सकी। AIMIM का उभार और राजद का पारंपरिक वोट बैंक खिसकने से महागठबंधन की स्थिति और बिगड़ गई।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि कांग्रेस का मुख्य चेहरा चुनावी पराजय के बाद गायब हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया गया कि राहुल गांधी को अपनी भतीजी मिराया वाड्रा के साथ लंदन एयरपोर्ट पर देखा गया।
हालांकि कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक ने यह कहते हुए वीडियो को खारिज किया कि यह सितंबर का पुराना दृश्य है।इसके बावजूद अफ़वाहें थम नहीं रहीं कहीं कहा गया कि वे लंदन में हैं, कहीं मस्कट में। ऐसी किसी भी यात्रा की कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
चुनावी हार के बाद राहुल गांधी की चुप्पी पर भाजपा ने भी राजनीतिक तंज कसा। भाजपा प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि जब तक राहुल गांधी विदेश में किसी दूसरे टाइम ज़ोन में जागेंगे, तब तक एनडीए यहाँ ट्रॉफी उठा चुका होगा। हालांकि दावा तो किया गया, पर भाजपा भी इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दे सकी।
बिहार चुनाव के परिणाम कांग्रेस के लिए सिर्फ हार नहीं, बल्कि नेतृत्व संकट, सियासी कमज़ोरी और जन-विश्वास के क्षरण का गहरा संकेत हैं। वोटर अधिकार यात्रा भीड़ जुटाने में सफल रही, लेकिन मतदाताओं के मन में कोई स्थायी असर छोड़ने में नाकाम रही। कांग्रेस फिलहाल पस्त है और उसका जनरल, राजनीतिक मोर्चे पर, अनुपस्थित है।बिहार विधानसभा चुनाव

