वंदे मातरम के 150 वर्ष पर जोशीमठ कॉलेज में राष्ट्र चेतना से ओतप्रोत प्रतियोगिताओं का आयोजन”ल!वंदे मातरम राष्ट्रीय चेतना का प्राण है — डॉ. उपेंद्र सिंह

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ज्योतिर्मठ, 16 नवंबर।राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ के वनस्पति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रगीत वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विभिन्न साहित्यिक व रचनात्मक प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। विभाग के छात्र-छात्राओं में देशभक्ति की भावना जगाने और राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता और क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित करते हुए बताया गया कि पोस्टर प्रतियोगिता में अनामिका ने प्रथम, आस्था ने द्वितीय और अनुष्का ने तृतीय स्थान पाया। निबंध प्रतियोगिता में रंजना प्रथम, अपेक्षा द्वितीय तथा अनामिका और वैदेही संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त करने में सफल रहीं। वहीं क्विज प्रतियोगिता में स्नेहा ने प्रथम, अंजली ने द्वितीय और इशिता ने तृतीय स्थान हासिल किया।
निबंध और पोस्टर प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. राहुल तिवारी, डॉ. मुकेश चंद और डॉ. राजेन्द्र सिंह ने निभाई।

सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए विभाग प्रभारी एवं प्रतियोगिताओं के नोडल अधिकारी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उपेंद्र सिंह ने कहा कि “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि राष्ट्रीय चेतना का प्राण है। यह इतिहास की वह स्मृति गाथा है जिसने पराधीन भारत में देशप्रेम का ज्वार उत्पन्न किया और स्वतंत्रता आंदोलन को नयी दिशा दी।”
उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत की भावनात्मक व सांस्कृतिक विरासत को सदैव बनाए रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए और विजेताओं को अगले स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए प्रोत्साहित किया गया। महाविद्यालय प्रबंधन ने विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रोन्मुख शिक्षा की दिशा में एक प्रेरक कदम बताया।


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