

आज उत्तराखंड का आसमान शोक में डूबा है। पहाड़ की धरती का हर पत्ता, हर नदी, हर देवदार और हर गाँव आज मौन है। क्योंकि उत्तराखंड ने आज अपने सबसे दृढ़ सेनानी… अपने युग निर्माता… अपने फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट को खो दिया। वह नाम, जो केवल एक व्यक्ति भर नहीं था — बल्कि एक आंदोलन की आवाज था, एक इतिहास था, एक संघर्ष था, और एक संकल्प था।

देहरादून के श्री इंद्रेश अस्पताल से आज ही छुट्टी मिलने के बाद अपने हरिद्वार स्थित निवास पहुंचे दिवाकर भट्ट जी ने अंतिम सांस ली। लंबी बीमारी से जूझने के बाद आज शरीर भले ही थक चुका था, लेकिन यह सत्य है कि उनका संघर्ष कभी नहीं थका, न थमा। पहाड़ की आत्मा का एक अंश आज संसार से विदा हो गया।
उनके निधन की खबर जैसे ही प्रदेश भर में फैली — उत्तराखंड क्रांति दल, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी परिवार और पूरा उत्तराखंड सन्न रह गया। सोशल मीडिया पर यूकेडी अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती का भावुक संदेश सिर्फ एक मित्र के खोने का दर्द नहीं था — बल्कि एक युग के समाप्त होने का क्रंदन था।
“45 वर्षों का साथ… आज मैंने अपना बड़ा भाई खो दिया… उत्तराखंड क्रांति दल ने अपना सबसे मजबूत स्तंभ खो दिया।”
यह शब्द पढ़कर पूरे राज्य आंदोलनकारियों की आंखें नम हो गईं।
संघर्ष का वह अमर इतिहास — जहां दिवाकर भट्ट केवल नेता नहीं, ध्वजवाहक थे
जब 1990 के शुरुआती दशक में पहाड़ों की सूनी आंखों में राज्य का सपना पल रहा था, जब दिल्ली और लखनऊ की सत्ता उत्तराखंड की आवाज को सुनना ही नहीं चाहती थी — तभी उस आवाज को सबसे ऊँचा और सबसे मजबूत जिसने बनाया, उसका नाम था दिवाकर भट्ट।
न आंदोलन के पीछे कोई बड़ी राजनीतिक ताकत थी, न धन था, न संसाधन। लेकिन एक चीज थी — पहाड़ का आत्मसम्मान। और उस आत्मसम्मान को आवाज देने का काम दिवाकर भट्ट ने किया।
वे आंदोलन की भीड़ में एक चेहरा नहीं थे — वे आंदोलन की दिशा थे।
वे नारे के साथ चलने वाले नहीं थे — वे नारे बनाने वाले थे।
वे सड़क से शुरू हुए और सदन तक संघर्ष कर गए।
राजनीति का सफर — परंतु हमेशा आंदोलनकारियों का प्रतिनिधि
राज्य बनने के बाद सत्ता के दरवाजे उनके लिए खुले, लेकिन उनके दर्शन नहीं बदले।
• उत्तराखंड क्रांति दल से विधायक बने
• संघर्ष की राजनीति को विधानसभा तक पहुँचाया
• बाद में भाजपा सरकार में शहरी विकास एवं राजस्व मंत्री के रूप में ऐतिहासिक दायित्व निभाया
मंत्री बनना उनका लक्ष्य नहीं था — आंदोलन की पूर्ति उनका एकमात्र धर्म था।
वह सत्ता में आए भी तो आंदोलन की मांगों को लागू कराने के लिए।
वह जहां गए, संघर्ष की पगडंडी वहीं साथ गई।
जब वे कैबिनेट मंत्री थे — तब की स्मृति आज और भी भावुक कर रही है
मुझे व्यक्तिगत रूप से वह समय आज भी वैसा ही याद है जैसे कल की ही बात हो —
जब आप, दिवाकर भट्ट जी, शहरी विकास और राजस्व मंत्री के रूप में कार्यरत थे,
तब मैं अवतार सिंह बिष्ट को उधम सिंह नगर का जिलाध्यक्ष बनाने की आपने स्वीकृति दी थी।
वह केवल पद नहीं था —
वह एक राज्य आंदोलनकारी पर आपका विश्वास था।
वह एक मार्गदर्शन था —
कि मेरिट भूमि पर बनती है और संघर्ष पर टिकती है।
आपने जो सम्मान दिया, जो संरक्षण दिया, जो अपनापन दिया — वह आज जीवन की सबसे मूल्यवान स्मृतियों में से एक है।
आज वे नहीं हैं — लेकिन आंदोलन का हर पत्थर उनकी गवाही देता है
दिवाकर भट्ट का जाना केवल किसी नेता का निधन नहीं, बल्कि
उत्तराखंड आंदोलन की जीवित स्मृति का अंत है।
आज जो देहरादून राजधानी है, आज जो आय से पहले भूमि का अधिकार सुरक्षित है, आज जो पहाड़ की पहचान अलग राज्य के रूप में है —
उस हर ईंट के पीछे दिवाकर भट्ट का पसीना और त्याग जुड़ा है।
हर आंदोलनकारी के लिए आज का दिन ऐसा है जैसे अपना सगा, अपना घर, अपना इतिहास खो दिया हो।
दिवाकर भट्ट वह पर्वत थे — जो टूटे नहीं।
वह वह मशाल थे — जो बुझने से पहले बहुतों को रोशन कर गए।
हम राज्य आंदोलनकारियों की ओर से अंतिम प्रणाम
आज, राज्य आंदोलन के एक छोटे से सिपाही के रूप में,
मैं — अवतार सिंह बिष्ट, अध्यक्ष उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद,
प्रदेश के समस्त राज्य आंदोलनकारियों, संघर्षकारियों, शहीद परिवारों, समर्थकों और पहाड़ की जनता की ओर से —
आपको भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
हम सबके लिए आप नेता नहीं थे — हमारे प्रेरणास्रोत थे।
आपके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष का अर्थ समझाएंगे।
आपका जीवन हमें बताता रहेगा कि
पहाड़ झुकते नहीं — पहाड़ लड़ते हैं।
आप चले गए, पर आपका नाम, आपका संघर्ष और आपकी विरासत रहेगी
✦ उत्तराखंड के फील्ड मार्शल का खिताब हमेशा इतिहास में अमर रहेगा
✦ उत्तराखंड राज्य निर्माण में आपकी भूमिका सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी
✦ आपकी स्मृतियाँ हर आंदोलनकारी के दिल में जीवित रहेंगी
ईश्वर दिवाकर भट्ट जी की महान आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें,
और परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
एक प्रतिज्ञा
दिवाकर भट्ट जी,
आप आज भले ही शरीर रूप में हमारे बीच नहीं हैं,
पर हम — राज्य आंदोलनकारी —
आपके सपनों का उत्तराखंड पूर्ण बनाने की शपथ दोहराते हैं।
आपकी यादों को हम संजोए रखेंगे, आपके संघर्ष को हम आगे बढ़ाएंगे, और आपका नाम आने वाली हर पीढ़ी तक पहुँचाएंगे।
**”आप अमर हैं – आप रहेंगे।
आपके जैसे सेनानी कभी नहीं मरते।”**
समर्पित प्रदेश के समस्त राज्य आंदोलनकारियों की ओर से
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी




