

अंकिता भंडारी हत्याकांड—उत्तराखंड के इतिहास का वह काला अध्याय, जिसने न सिर्फ देवभूमि की आत्मा को झकझोरा, बल्कि सत्ता, सिस्टम और न्याय की विश्वसनीयता पर भी गहरे सवाल खड़े किए। 18 दिसंबर 2022 को हुए इस जघन्य हत्याकांड को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन “VIP कौन था?”—यह सवाल आज भी जनता के मन में जिंदा है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
अब इस मामले में एक बार फिर सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। ज्वालापुर के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने एक 24 मिनट लंबी फेसबुक लाइव वीडियो के जरिए ऐसे दावे किए हैं, जो अगर सत्य के करीब भी हैं, तो यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि सत्ता-संरक्षण और संगठित अपराध का प्रतीक बन जाता है।
उर्मिला सनावर के आरोप: सिर्फ बयान नहीं, चेतावनी
उर्मिला सनावर का दावा है कि अंकिता भंडारी पर “ग्रुप सेक्स” के लिए दबाव डाला गया था और इसमें तथाकथित “VIP” शामिल थे। मना करने पर ही अंकिता की हत्या की गई। यह वही आशंका है, जिसे अंकिता के परिजन और आम जनता शुरू से उठाते आ रहे हैं।
अंकिता की व्हाट्सएप चैट्स आज भी इस बात की गवाही देती हैं कि वह रिजॉर्ट में खुद को असुरक्षित महसूस कर रही थी। “VIP गेस्ट आ रहे हैं, उन्हें एक्स्ट्रा सर्विस चाहिए”—यह पंक्ति केवल शब्द नहीं, बल्कि एक व्यवस्था पर गंभीर आरोप है।
वायरल ऑडियो और बड़े नाम
सबसे गंभीर पहलू वह वायरल ऑडियो बताया जा रहा है, जिसमें पूर्व विधायक सुरेश राठौर कथित तौर पर यह कहते सुनाई देते हैं कि हत्या वाली रात एक बड़े भाजपा नेता—दुष्यंत कुमार गौतम—उसी रिजॉर्ट में मौजूद थे। दुष्यंत कुमार गौतम न सिर्फ राज्यसभा सांसद हैं, बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी भी रह चुके हैं।
ऑडियो में यह भी दावा किया गया है कि कुछ ऑडियो–वीडियो सबूत एक भाजपा नेत्री के पास मौजूद हैं। यदि ऐसा है, तो सवाल यह नहीं कि जांच क्यों हो, बल्कि यह है कि अब तक क्यों नहीं हुई?
जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल
अब तक की जांच में पुलकित आर्य और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार जरूर किया गया, लेकिन “VIP एंगल” हमेशा धुंध में रहा। क्या जांच एजेंसियां किसी दबाव में थीं? क्या सत्ता के गलियारों तक पहुंचने से पहले ही जांच की सीमाएं तय कर दी गईं?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मामला केवल एक बेटी की हत्या का नहीं, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा है।
सीबीआई जांच की मांग फिर तेज
उर्मिला सनावर के ताजा आरोपों के बाद एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है। यह मांग नई नहीं है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। जब नाम सामने आ रहे हैं, ऑडियो वायरल हो रहे हैं और सत्ता के उच्च स्तर तक उंगलियां उठ रही हैं, तब निष्पक्ष जांच ही एकमात्र रास्ता बचता है।
न्याय सिर्फ सज़ा नहीं, सच का उजागर होना है
अंकिता भंडारी को न्याय तब मिलेगा, जब सिर्फ आरोपी सज़ा नहीं पाएंगे, बल्कि यह भी सामने आएगा कि उसे किन ताकतों ने, किन हालातों में मौत के मुंह में धकेला। अगर VIP शामिल थे, तो उनका नाम सामने आना चाहिए—चाहे वे कितने ही ताकतवर क्यों न हों।
देवभूमि की जनता अब सिर्फ फैसले नहीं, पूरी सच्चाई चाहती है। क्योंकि अगर इस मामले में भी सच दबा दिया गया, तो यह केवल अंकिता की हार नहीं होगी, बल्कि पूरे न्याय तंत्र की हार होगी।
अब सवाल साफ है—क्या सरकार और जांच एजेंसियां इस बार सच का सामना करने का साहस दिखाएंगी, या फिर अंकिता भंडारी का सच फाइलों में ही दफन रह जाएगा?




