यह रक्षा खरीद की लंबी प्रक्रिया का पहला औपचारिक चरण होता है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
इस बैठक में सेना के लिए लोइटर मुनिशन सिस्टम (कामिकेज ड्रोन), लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (एमएलआरएस) के लिए लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट गोला-बारूद और इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (आईडीडीएंडआईएस) मार्क-2 की खरीद को मंजूरी दी गई।
बराक-8 मिसाइलों पर सबसे बड़ा फैसला
DAC से सबसे बड़ी मंजूरी करीब 30,000 करोड़ रुपये की परियोजना को मिली है, जिसके तहत वायुसेना और नौसेना के लिए बड़ी संख्या में बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें खरीदी जाएंगी। यह प्रणाली इजराइल के सहयोग से विकसित की गई है और इसकी इंटरसेप्शन रेंज 70 किलोमीटर से अधिक है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मई में सीमा पार तनाव के दौरान पाकिस्तान द्वारा दागे गए तुर्की ड्रोन और चीनी मिसाइलों के कई हमलों को रोकने में बराक-8 आधारित बहु-स्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क ने अहम भूमिका निभाई थी।
MQ-9B ड्रोन और मिड-एयर रिफ्यूलर
DAC ने नौसेना के लिए दो अतिरिक्त MQ-9B प्रिडेटर हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन तीन साल के पट्टे पर लेने को भी मंजूरी दी, जिसकी लागत करीब 1,600 करोड़ रुपये है। भारत के पास मौजूदा समय में दो ड्रोन हैं। ये तब तक की कमी पूरी करेंगे, जब तक 2029-30 में अमेरिका से 31 सशस्त्र MQ-9B ड्रोन की डिलीवरी पूरी नहीं हो जाती।
इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के लिए लंबे समय से लंबित छह मिड-एयर रिफ्यूलिंग विमान खरीदने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिली है। करीब 9,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना में इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज छह सेकेंड-हैंड बोइंग 767 विमानों को टैंकर में बदलेगा, जिससे लड़ाकू विमानों की परिचालन सीमा में बड़ा इजाफा होगा।
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के तहत DAC ने दो अहम डिजाइन और विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनमें DRDO द्वारा विकसित अस्त्र मार्क-2 एयर-टू-एयर मिसाइल की रेंज को 100 किमी से बढ़ाकर 200 किमी करने की योजना और पिनाका गाइडेड रॉकेट सिस्टम की मारक क्षमता को 75 किमी से 120 किमी तक बढ़ाना शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, पिनाका का 120 किमी रेंज वाला संस्करण हाल ही में सफल परीक्षण से गुजरा है और भविष्य में इसकी रेंज 300 किमी तक ले जाने पर काम जारी है।
अस्त्र, मीटियोर और स्पाइस
वायुसेना के लिए प्रारंभिक तौर पर 600-700 अस्त्र-2 मिसाइलें खरीदी जाएंगी, जबकि भविष्य में 350 किमी रेंज वाली अस्त्र-3 भी विकसित की जाएगी। इसके अलावा, राफेल लड़ाकू विमानों के लिए कुछ अतिरिक्त मीटियोर मिसाइलें और SPICE-1000 बमों के लिए इजरायली गाइडेंस किट खरीदने को भी AoN मिली है।
कामिकाजी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम
सेना की नई ‘शक्तिबाण’ और ‘दिव्यास्त्र’ आर्टिलरी यूनिट्स के लिए 850 कामिकाजी ड्रोन/लॉइटरिंग म्यूनिशन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिनकी अनुमानित लागत करीब 2,000 करोड़ रुपये है। ये ड्रोन ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही बनाए जाएंगे।
इसके साथ ही इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDD&IS) मार्क-2 को भी स्वीकृति मिली है, जिसमें 30 किलोवाट लेजर के जरिए 3.5 किमी तक छोटे ड्रोन और ड्रोन स्वार्म को निष्क्रिय या नष्ट करने की क्षमता होगी।
अन्य अहम स्वीकृतियां
DAC ने रूस में Mi-17 हेलिकॉप्टरों के ओवरहॉल, भारत में T-90S मुख्य युद्धक टैंकों के ओवरहॉल, लो-लेवल लाइट-वेट रडार, नौसेना के टग बोट्स, तेजस लड़ाकू विमान के लिए फुल मिशन सिम्युलेटर, ऑटोमैटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम और लंबी दूरी के सुरक्षित संचार के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो की खरीद को भी मंजूरी दी है।
सामरिक संदेश
विशेषज्ञों के मुताबिक, इन फैसलों से न केवल वायु, थल और नौसेना की संयुक्त युद्ध क्षमता में बड़ा इजाफा होगा, बल्कि स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच यह पैकेज भारत की दीर्घकालिक सैन्य तैयारी और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

