देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ऑल इंडिया चकमा स्टूडेंट यूनियन समेत कई संगठनों ने इसे नस्लीय हमला (हेट क्राइम) करार देते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

Spread the love

वहीं, दून पुलिस ने नस्लीय टिप्पणी और नस्लीय हमले के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एसएसपी अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह विवाद नस्लीय नहीं, बल्कि दो गुटों के बीच अचानक हुई कहासुनी का परिणाम था। उन्होंने तर्क दिया कि हमलावर गुट में खुद पूर्वोत्तर (मणिपुर), नेपाल और बोक्सा जनजाति के युवक शामिल थे।

एसएसपी अजय सिंह का कहना कि यह एक बेहद दुखद घटना है। मृतक छात्र एंजल चकमा अपने भाई के साथ बाजार से सामान खरीदने गया था। उसी दौरान पास में छह युवकों का एक समूह शराब पी रहा था। इसी बीच दोनों पक्षों में किसी बात को लेकर टीका-टिप्पणी हुई, जो देखते ही देखते तीखी झड़प में बदल गई।

एंजेल चकमा पर नस्लीय हमला नहीं हुआः पुलिस का दावा

विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने छात्र के साथ जमकर मारपीट की, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। अस्पताल में उपचार के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया। सोशल मीडिया पोस्ट और छात्र संगठनों के उठाए जा रहे नस्लीय हमले के मुद्दे पर एसएसपी ने स्थिति साफ की।

हत्या की धारा में मुकदमा

सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की सूचना के आधार पर छह आरोपियों की पहचान की। इनमें से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। छात्र की मौत के बाद पुलिस ने मुकदमे में हत्या की धाराएं जोड़ दी हैं।

आरोपी की तलाश को नेपाल पहुंची पुलिस

घटनाक्रम देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। एसएसपी ने बताया कि फरार चल रहे छठे आरोपी के खिलाफ कोर्ट से वारंट प्राप्त कर लिया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं। आरोपी नेपाल भाग गया है। सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ और पुलिस टीम बार्डर क्रास कर नेपाल भी पहुंची। हालांकि आरोपी को गिरफ्तार करने में कामयाबी नहीं मिली है।


Spread the love