अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही कांग्रेसः विकास शर्मा!अंकिता भंडारी हत्याकांड पर राजनीति से नहीं, न्याय से चले सरकार—महापौर की दो टूक

Spread the love


रुद्रपुर। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों पर रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा ने तीखी और व्यापक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड में कांग्रेस का आंदोलन न्याय की पुकार नहीं, बल्कि अपनी डूबती सियासत और राजनीतिक अस्तित्व बचाने की छटपटाहट है। कांग्रेस पीड़ित परिवार के दर्द को नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक भविष्य को केंद्र में रखकर सड़कों पर उतर रही है।
महापौर विकास शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक संवेदनशील और हृदयविदारक अपराध को बार-बार राजनीतिक मंच बनाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेताओं के धरना-प्रदर्शन न्याय की प्रक्रिया को मज़बूत करने के बजाय अराजकता, दबाव की राजनीति और शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)


उन्होंने स्पष्ट किया कि धामी सरकार ने अंकिता भंडारी प्रकरण को किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और कानून के दायरे में देखा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं पीड़ित परिवार के संपर्क में रहे, जांच में आवश्यक सुधार किए गए और बिना किसी दबाव के प्रकरण को न्यायालय तक पहुँचाया गया। साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा मिली और वे आज सलाखों के पीछे हैं—यह सरकार की पारदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व का प्रमाण है।
महापौर ने कहा कि न्यायालय के निर्णय के बाद भी कांग्रेस द्वारा इस मामले को बार-बार उछालना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह न्यायपालिका की प्रक्रिया पर अविश्वास पैदा करने का प्रयास भी है। यदि कांग्रेस के पास इस प्रकरण से जुड़े कोई ठोस सबूत थे, तो उन्हें समय रहते जांच एजेंसियों या सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए था। अब सड़कों पर शोर मचाकर भ्रम फैलाना राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है।
पुराने चिट्ठे भी खोलती है कांग्रेस की राजनीति
विकास शर्मा ने कांग्रेस के इतिहास की ओर इशारा करते हुए कहा कि देश और राज्य ने वह दौर भी देखा है जब कांग्रेस के शासन में घोटाले, राजनीतिक संरक्षण और न्याय में देरी आम बात थी। आज वही कांग्रेस नैतिकता का पाठ पढ़ाने निकली है, जबकि जनता उसके अतीत को भली-भांति जानती है। चुनाव-दर-चुनाव पराजय, मुद्दाविहीन राजनीति और नेतृत्वहीनता ने कांग्रेस को हाशिये पर धकेल दिया है—इसी हताशा में वह हर संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाना चाहती है।
कांग्रेस के लिए एक ‘शिक्षक’ की तरह संदेश
महापौर ने कहा कि कांग्रेस को चाहिए कि वह राजनीतिक शोरगुल छोड़कर संवैधानिक मर्यादाओं में रहना सीखे। यदि किसी के पास नए तथ्य या प्रमाण हैं, तो उन्हें कानूनी और संवैधानिक माध्यमों से सामने लाया जाए। सड़क की राजनीति से न तो न्याय तेज़ होता है और न ही पीड़ित को सुकून मिलता है। न्याय तथ्यों, सबूतों और अदालत से मिलता है—न कि नारेबाज़ी से।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार पहले भी अंकिता के परिवार के साथ खड़ी थी, आज भी खड़ी है और आगे भी न्याय व कानून के पक्ष में मजबूती से खड़ी रहेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनहित, पारदर्शिता और निर्णायक शासन के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। कांग्रेस को चाहिए कि वह आत्ममंथन करे—क्योंकि जनता अब भावनाओं से नहीं, परिणामों से राजनीति को आंकती है।


Spread the love