

“बेटी अंकिता को न्याय दिलाने के लिए किसी भी स्तर की जांच से पीछे नहीं हटेंगे”—यह आपका ही बयान है, माननीय मुख्यमंत्री जी। इसी बयान को आधार बनाकर आज पूरा उत्तराखंड आपसे एक सीधा, स्पष्ट और ईमानदार सवाल पूछ रहा है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)
अगर इस पूरे प्रकरण में वीआईपी वाकई बेगुनाह है, अगर वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, अगर उसकी फेसबुक आईडी और लोकेशन कहीं और की गवाही दे रही है—तो फिर सीबीआई जांच से परहेज़ क्यों?
न्याय से भागने वाला तो दोषी होता है, बेगुनाह नहीं।
यह सवाल किसी राजनीतिक दल का नहीं है, यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का भी नहीं है। यह सवाल उत्तराखंड की आत्मा, उसकी बेटियों की सुरक्षा और जनविश्वास का है। आज प्रदेश के हर गांव, हर शहर, हर घर से एक ही आवाज़ उठ रही है—सीबीआई जांच हो।
आप केंद्र में भी सत्ता के मजबूत हिस्सेदार हैं, राज्य में भी आपकी ही सरकार है। न कोई संवैधानिक अड़चन है, न कानूनी बाधा। फिर यह असहजता क्यों?
क्या सीबीआई जांच से कोई सच्चाई सामने आ जाएगी, जिससे कुछ नाम, कुछ चेहरे और कुछ पद असुविधाजनक हो जाएंगे?
आप कहते हैं कि यदि इस संवेदनशील विषय को षड्यंत्र के तहत भटकाया गया, तो जनता जवाब देगी। मुख्यमंत्री जी, आज वही जनता आपसे जवाब मांग रही है।
अगर सीबीआई जांच होगी तो किसी पर आरोप नहीं लगेगा, सिर्फ़ सच्चाई सामने आएगी। और अगर सच्चाई में कोई वीआईपी निर्दोष है, तो सीबीआई जांच उसी को सबसे पहले राहत देगी।
उत्तराखंड यह नहीं कह रहा कि “फलां दोषी है”।
उत्तराखंड सिर्फ़ यह कह रहा है कि—
वीआईपी कौन है, यह देश जाने।
जांच ऐसी हो जिस पर कोई सवाल न उठा सके।
न्याय दिखे भी और महसूस भी हो।
अगर आप सीबीआई जांच का आदेश देते हैं, तो इतिहास आपको उस मुख्यमंत्री के रूप में याद रखेगा जिसने सत्ता से ऊपर सत्य और न्याय को रखा।
और अगर नहीं देते—तो यह संदेह भी इतिहास में दर्ज होगा कि कहीं न कहीं कुछ ऐसा था, जिसे छुपाने की कोशिश की गई।
मुख्यमंत्री जी,
यह कोई चुनौती नहीं, यह अंतिम अपील है।
सीबीआई जांच कराइए।
उत्तराखंड आपकी परीक्षा नहीं ले रहा,
उत्तराखंड आप पर भरोसा करना चाहता है।




