स्थानीय मीडिया के मुताबिक कश्मीर प्रशासन ने घाटी में बिजली काटने का फैसला किया है. यह फैसला भारत के संभावित हमले को देखते हुए लिया गया है. कश्मीर प्रशासन का कहना है कि यह ब्लैकआउट रात में बड़े हमले से बचने के लिए किया गया है.

संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
नीलम घाटी कहां पर है?
नीलम घाटी नियंत्रण रेखा (LoC) से महज 3 किलोमीटर दूर है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित कश्मीर क्षेत्र को बांटती है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नीलम घाटी को पर्यटक स्थल माना जाता है. यहां पर दुनियाभर के लोग घूमने के लिए आते हैं.
नीलम घाटी में करीब 2 लाख लोग रहते हैं, जो कश्मीर मूल के हैं. नीलम घाटी पर भारत का दावा रहा है, लेकिन पीओके की वजह से यह पाकिस्तान के हिस्से में चला गया है.
पर्यटकों के न आने से सन्नाटा
पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद से ही नीलम घाटी में सन्नाटा पसरा है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक लोग यहां जाने से डरे हुए हैं. लोगों को यह डर है कि भारत सबसे पहले यहीं पर अटैक करेगा.
यही वजह है कि भीषण गर्मी में भी नीलम घाटी में लोगों की आवाजाही नहीं है. नीलम घाटी में जो स्थानीय निवासी हैं, वो भी बंकर की तरफ मूव कर गए हैं. पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है.
ब्लैकआउट का फैसला
नीलम घाटी पर खतरे को देखते हुए कुछ ही दिन पहले कश्मीर प्रशासन ने सभी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी थी. प्रशासन का कहना था कि अभी वक्त ठीक नहीं है, इसलिए सभी लोग अपने काम पर रहें. छुट्टी रद्द करने के बाद अब प्रशासन ने ब्लैकआउट का फैसला किया है.
प्रशासन का कहना है कि बिजली गुल की स्थिति में काफी जानकारियां सामने नहीं आ पाएगी, जिससे भारत के संभावित हमले से नीलम घाटी को बचाया जा सकता है.
सोमवार (स्थानीय समय) को कैपिटल हिल में कांग्रेस की ब्रीफिंग में अपनी टिप्पणी में जॉनसन ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बारे में भी बात की और उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अच्छी तरह से काम करेगी. पिछले कई दशकों से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहे भारत के लिए उनके संदेश के बारे में पूछे जाने पर माइक जॉनसन ने कहा, ‘देखिए, वहां जो कुछ हो रहा है, उसके लिए हमारी बहुत सहानुभूति है और हम अपने सहयोगियों के साथ खड़े होना चाहते हैं. मुझे लगता है कि भारत कई मायनों में हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण साझेदार है. मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अच्छी तरह से काम करेगी. किसी ने मुझसे टैरिफ के बारे में नहीं पूछा, मुझे खुशी है. हां, लेकिन हमारे लिए और इतने महत्वपूर्ण देश में इतनी बड़ी आबादी के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण रिश्ता है. और भारत को वहां भी आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना होगा .’
माइक जॉनसन ने किया भारत का समर्थन
माइक जॉनसन ने कहा, ‘हम अमेरिका में उन प्रयासों का समर्थन करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे . और मुझे लगता है कि यह सब इस रिश्ते का हिस्सा है क्योंकि यह विकसित हो रहा है. ट्रम्प प्रशासन स्पष्ट रूप से उस रिश्ते के महत्व को समझता है और आतंकवाद के खतरे के महत्व को भी स्पष्ट रूप से समझता है . और इसलिए मुझे लगता है कि अगर यह खतरा बढ़ता है, तो मुझे लगता है कि आप प्रशासन को देखेंगे, मेरा मानना है कि वे इससे निपटने में मदद करने के लिए अधिक ऊर्जा, संसाधन और समय लगाएंगे. यह निश्चित रूप से हमारी आशा है.’
ट्रंप प्रशासन ने 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में भारत के लिए समर्थन व्यक्त किया है, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए. 30 अप्रैल को, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ सहयोग करने की संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रतिबद्धता की पुष्टि की . पहलगाम में ‘भयानक आतंकवादी हमले’ में जान गंवाने वालों के लिए अपना दुख व्यक्त करते हुए, रुबियो ने भारत को ‘तनाव कम करने’ और दक्षिण एशिया, अमेरिका में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया.
विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने एक बयान में कहा
टैमी ब्रूस ने एक बयान में कहा, ‘विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आज भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की. मंत्री ने पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों के प्रति दुख व्यक्त किया और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ सहयोग करने की अमेरिका की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की. उन्होंने भारत को पाकिस्तान के साथ मिलकर तनाव कम करने और दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए काम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया.’
23 अप्रैल को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत की और जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की. ट्रम्प ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की और इस ‘जघन्य हमले’ के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए भारत को पूरा समर्थन व्यक्त किया.
एक्स पर एक पोस्ट में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प @realDonaldTrump @POT US ने प्रधानमंत्री @narendramodi को फोन किया और जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में निर्दोष लोगों की मौत पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की. राष्ट्रपति ट्रम्प ने आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और इस जघन्य हमले के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए भारत को पूर्ण समर्थन व्यक्त किया. भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक साथ खड़े हैं.’
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को युद्ध या किसी अन्य हमले की स्थिति में खुद को बचाने के लिए प्रशिक्षित करना है।
244 जिलों में होगा अभ्यास
यह मॉक ड्रिल देश के 244 चिन्हित जिलों में आयोजित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य सिविल डिफेंस की तैयारियों को और मजबूत करना है। बता दें कि आखिरी बार भारत में इस तरह की आखिरी मॉक ड्रिल 1971 में हुई थी।
इन जिलों में होगी मॉक ड्रिल
पोर्ट ब्लेयर, हैदराबाद, विशाखापत्तनम, आलोग, इटानगर ,तवांग, हायूलिंग ,बोंगईगांव, डिबरुगढ़, डुबरी, गोलपारा, जोरहट,शिवसागर, तिनसुकिया, तेजपुर , डिगबोई, डिलियाजन ,गुवाहाटी, रंगिया नामरुप, नजिरा, नॉर्थ लक्ष्मीपुर,नुमालीगढ़, बरौनी,कटिहार, पटना,पुर्णिया,चंडीगढ़, दुर्ग, दादरा, दमन, दिल्ली, बालासोर, कोरापुट, भुवनेश्वर, गोपालपुर, हिराकुंड, पाराडीप, राउरकेला, पुड्डचेरी,अमृतसर, भटिंडा, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, पठानकोट, बरनाला,अदहमपुर, बाकरा नंगल, हलवारा, कोटकापुर, बटाला,मोहाली, अबोहर, अजमेर,अलवर,बारमेर,भरतपुर,बिकानेर,बुंदी,गंगानगर, हनुमानगढ़,जयपुर,जैसलमेर,जोधपुर,उदयपुर,सीकर,नल,सुरतगढ़,अबू रोड,नासिराबाद, भिवारी, इलाहाबाद,बरेली, गाजियाबाद,गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद,सहारनपुर,वाराणसी, मुगलसराय,सरसावा, बुलंदशहर , बागपत,मुजफ्फरनगर,बेगूसराय, बोमडीला,डरांग, गोलाघाट, भदरक, डेनकनाल, जगतसिंहपुर, केंद्ररपुर
क्यों बजते हैं जंग वाले सायरन?
जंग के सायरन किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थिति में लोगों को सतर्क करने के लिए बजाए जाते हैं। यह एक तेज आवाज वाला चेतावनी प्रणाली है, जिसकी आवाज काफी तीव्र होती है। इन सायरनों की आवाज 2 से 5 किलोमीटर की दूरी तक सुनाई दे सकती है और यह 120-140 डेसिबल तक की ध्वनि उत्पन्न करते हैं। इनकी आवाज में एक खास लय होती है – यह धीरे-धीरे तेज होती है और फिर धीरे-धीरे कम होती है।

सायरन बजने पर क्या करें?
मॉक ड्रिल के दौरान या वास्तविक आपात स्थिति में सायरन बजने पर नागरिकों को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
- तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर जाएं।
- 5 से 10 मिनट के भीतर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का प्रयास करें।
- सायरन बजने के दौरान घबराएं नहीं।
- खुले क्षेत्रों से तुरंत हट जाएं।
- घरों और अन्य सुरक्षित इमारतों के अंदर चले जाएं।
- टीवी, रेडियो और सरकारी अलर्ट पर ध्यान दें।
- किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।

सायरन कहां लगेंगे?
ये सायरन मुख्य रूप से सरकारी भवनों, प्रशासनिक कार्यालयों, पुलिस मुख्यालयों, फायर स्टेशनों, सैन्य ठिकानों, शहर के बड़े बाजारों और भीड़भाड़ वाली अन्य जगहों पर लगाए जाएंगे।
सिविल मॉक ड्रिल में कौन-कौन शामिल होगा?
इस मॉक ड्रिल में जिला अधिकारी, स्थानीय प्रशासन के अधिकारी, सिविल डिफेंस वार्डन, पुलिसकर्मी, होम गार्ड्स, कॉलेज और स्कूल के छात्र, नेशनल कैडेट कॉर्प्स (NCC), नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) और नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS) के सदस्य शामिल होंगे।

