

बिजनौर (उत्तर प्रदेश)।उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नंदपुर गांव से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां एक प्राचीन मंदिर में एक कुत्ता इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि इस कुत्ते ने लगातार पांच दिनों तक (करीब 120 घंटे) बिना कुछ खाए-पिए हनुमान जी और मां दुर्गा की मूर्तियों की परिक्रमा की। इस घटना को चमत्कार मानते हुए दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं और कुत्ते की भी पूजा की जा रही है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
श्रद्धा या अंधविश्वास?बिजनौर में मंदिर परिसर में एक बीमार कुत्ते को ‘चमत्कारी’ मानकर पूजना समाज की सोच पर गंभीर सवाल खड़े करता है। श्रद्धा जब विवेक से कट जाती है, तो वह अंधविश्वास बन जाती है। सनातन धर्म करुणा, तर्क और ज्ञान का मार्ग दिखाता है, न कि अंधभक्ति का। इलाज की जरूरत वाले कुत्ते को देवत्व देना मानवता नहीं, संवेदनहीनता है। मीडिया द्वारा ऐसी घटनाओं को चमत्कार बताकर दिखाना भ्रम को और गहरा करता है। विज्ञान और सनातन विरोधी नहीं, दोनों सत्य के पक्षधर हैं। आस्था तभी सार्थक है जब उसमें विवेक और करुणा हो।
ग्रामीणों के अनुसार, यह कुत्ता पिछले कई दिनों से मंदिर परिसर में ही मौजूद था और लगातार मूर्तियों की परिक्रमा करता रहा। लगातार भूखे-प्यासे रहने के कारण जब वह निढाल होकर गिर पड़ा, तो मंदिर समिति ने उसे सम्मानपूर्वक गद्दे पर लिटाया और रजाई ओढ़ा दी। इसके बाद यह खबर पूरे इलाके में फैल गई और मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बन गया।
कुत्ते को भी चढ़ावा, मन्नतें मांग रहे श्रद्धालु
स्थिति यहां तक पहुंच गई कि अब श्रद्धालु भगवान के साथ-साथ कुत्ते के आगे भी मत्था टेक रहे हैं। लोग उसके सामने प्रसाद चढ़ा रहे हैं और रुपये-पैसे का चढ़ावा भी दे रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि कुत्ते पर किसी दैवीय शक्ति की कृपा है, इसलिए उससे मन्नतें भी मांगी जा रही हैं। मंदिर के बाहर खिलौनों और प्रसाद की अस्थायी दुकानें भी सज गई हैं।
पशु चिकित्सकों ने संभाली स्थिति
लगातार कई दिनों तक कुछ न खाने-पीने के कारण कुत्ते की हालत गंभीर हो गई। बताया जा रहा है कि उसने दूध और रोटी तक खाने से इनकार कर दिया। हालात बिगड़ते देख पशु चिकित्सकों को मौके पर बुलाया गया।
पशु चिकित्सक डॉ. अश्वनी चित्रांश ने बताया कि कुत्ते के शरीर में पानी और मिनरल्स की भारी कमी हो गई थी। उसकी जान बचाने के लिए उसे ग्लूकोज और मल्टी-विटामिन की ड्रिप दी जा रही है। इसके साथ ही ‘फ्रूट थेरेपी’ शुरू की गई है, ताकि शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिल सकें।
आस्था बनाम विज्ञान
इस पूरे मामले में आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा धुंधली पड़ती नजर आ रही है। जहां एक ओर विज्ञान इसे कुत्ते की बीमारी या शारीरिक कमजोरी से जोड़कर देख रहा है, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे चमत्कार मानकर श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन और पशु चिकित्सक कुत्ते की सेहत पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन यह घटना समाज में फैली अंधश्रद्धा पर भी कई सवाल खड़े कर रही है।




